लखनऊ। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया, अब उनकी छठी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी मनाई जाती है, यही परंपरा श्रीकृष्ण के जन्म के 6 दिन बाद निभाई जाती है। इस बार कान्हा की छठी 9 सितंबर को मनायी जायेगी।
जिसे बाल गोपाल की छठी या लड्डू गोपाल की छठी के नाम से जाना जाता है। भगवान कृष्ण की छठी घर के साथ मंदिरों में भी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन लड्डू गोपाल को विधि-विधान से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें प्रिय भोग अर्पित किया जाता है।
लड्डू गोपाल को छठी में किन चीजों का भोग लगाना चाहिए:
भगवान कृष्ण की छठी पर कढ़ी चावल का भोग अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा आप माखन, मिश्री व मालपुआ आदि का भोग लगा सकते हैं।
बाल गोपाल की छठी पर बन रहे खास संयोग:
इस बार लड्डू गोपाल की छठी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य सफलतादायक होते हैं।
छठी पूजा का क्या है धार्मिक महत्व :
पं. बिन्द्रेस दुबे के अनुसार सनातन परंपरा में छठी या फिर कहें षष्ठी देवी की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। मान्यता है कि छठी माता की पूजा करने पर नवजात शिशु तमाम तरह की आपदाओं से बचा रहता है. ऐसे में कान्हा के भक्त जन्मोत्सव के बाद इस पर्व का हर साल बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं।
कान्हा की छठी पूजा विधि:
प्रत्येक व्यक्ति अपने लड्डू गोपाल की अपनी आस्था के अनुसार छठी पूजा का समय चुनता है। कान्हा की छठी पूजा करने से पहले आप तन-मन से पवित्र हो जाएं फिर उसके बाद पूजा की सभी सामग्री अपने पास रख लें। इसके बाद जिस तरह आम बच्चे की छठी मनाने से पहले उसका स्नान कराया जाता है, कुछ वैसे ही कान्हा को स्नान कराएं। भगवान श्री कृष्ण को पहले पंचामृत से फिर गंगाजल से स्नान कराएं और फिर उन्हें साफ कपड़े से पोंछने के बाद नए वस्त्र और आभूषण आदि से विशेष श्रृंगार करें, फिर इसके बाद अपने लड्डू गोपाल को चंदन, केसर, हल्दी, फल, फूल, धूप, दीप, अर्पित करें. कान्हा की छठी पूजा में उनकी प्रिय चीजें जैसे बांसुरी, मक्खन मिश्री, मोर पंख जरूर अर्पित करें. इसके बाद उनका नाम करण करने के लिए जिस नाम से उन्हें आप पूजते हों, वह नाम बुलाएं और पूरे साल उनकी उसी नाम से साधना करें. पूजा के अंत में उनकी आरती करें तथा सभी को प्रसाद बांटे और स्वयं भी ग्रहण करें।
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कान्हा की छठी पर 5 चीजों का लगायें भोग, होगा शुभ
लखनऊ। लड्डू गोपाल की छठी जन्माष्टमी के 6 दिन बाद यानी 9 सितंबर को है। लड्डू गोपाल की सेवा लोग अपने बच्चे की तरह करते हैं इसलिए उनकी छठी भी अपने बच्चे की तरह पूरे विधि विधान के साथ मनाते हैं। बता दें कि सनातन धर्म में बच्चे होने के छह दिन बाद छठी मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, बच्चे होने के छह दिन बाद उसकी शुद्धि की जाती है। जोकि छह दिन बाद होती है तो इसलिए इसे छठी कहा जाता है। साथ ही इस दिन कढ़ी चावल और बाकी पकवान बनाए जाते हैं। कढी इस दिन इसलिए बनाई जाती है क्योंकि वह बेसन और दही से बनती है और बेसन और दही दोनों को ही ठंडा माना जाता है।
लड्डू गोपाल को लगाएं कढ़ी चावल का भोग:
लड्डू गोपाल की छठी के दिन जो कढ़ी चावल बनाए जाते हैं उसमें प्याज लहसुन का प्रयोग न करें। घर के मसालों का इस्तेमाल करते हुए कढ़ी बनाई जाती है। ऐसा मान्यता है कि इस तरह बनाए गए कढ़ी चावल से शीतलता मिलती है।
लड्डू गोपाल को लगाएं मखाने की खीर का भोग:
लड्डू गोपाल को मखाने की खीर का भोग भी लगाना जरूरी है। इस दिन मखाने की खीर लड्डू गोपाल को काफी प्रिय है। इसलिए छठी के दिन उन्हें मखाने की खीर का भोग जरुर लगाए।
धनिया की पंजीरी:
लड्डू गोपाल को धनिया पंजीरी बहुत ही पसंद है। उनकी छठी के दिन धनिया की पंजीरी का भोग जरूर लगाना चाहिए।
माखन मिश्री:
लड्डू गोपाल को माखन मिश्री बहुत ही प्रिय हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण अपने बचपन में माखन चुरा कर भी खाया करते थे। इसलिए छठी के दिन उनके लिए माखन मिश्री का भोग जरूर लगाएं। साथ ही पंच मेवे का भोग भी लड्डू गोपाल को जरुर लगाएं।





