लखनऊ। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व बताया गया है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा व व्रत किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अनजाने में किए पाप कटित होते हैं। पद्म पुराण में भी अजा एकादशी के व्रत का महात्म्य बताया गया है। बता दें कि हर महीने में दो एकादशी आती है एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 6 सितंबर, रविवार के दिन शाम को 7 बजकर 30 मिनट पर होगी। वहीं, अगले दिन यानी 7 सितंबर, सोमवार को शाम के 5 बजकर 5 मिनट तक एकादशी तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन व्रत रखना अत्यंत शुभ और पुण्य फलदायक माना गया है। अजा एकादशी पर स्नान, ध्यान और दान को पुण्यकारी माना गया है. इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात्विक वस्तुओं का दान किया जा सकता है. जरूरतमंद व्यक्ति को दान देने की परंपरा बताई गई है. अजा एकादशी पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए अन्नदान, आर्थिक समस्या के लिए वस्त्र, जूते या छाते का दान करने की मान्यता है. शीघ्र विवाह की कामना के लिए केसर, केला या हल्दी का दान कर सकते हैं. वहीं, विवाद या मुकदमे से राहत के लिए गुड़ या मिठाई का दान शुभ माना गया है।
अजा एकादशी का महत्व
जन्माष्टमी के कुछ ही दिन बाद अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और रात्रि में जागरण करना का अत्यंत महत्व बताया गया है। साथ ही, व्रती को व्रत के दौरान मन में विष्णुजी का ध्यान और उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। मान्यता है कि श्रद्धा भाव से एकादशी का व्रत करने से पाप कटित होते हैं और लोक से लेकर परलोक में भी इस व्रत का पुण्य फल मनुष्य को प्राप्त होता है।
अजा एकादशी व्रत पूजा विधि
एकादशी तिथि के दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना उत्तम माना जाता है। नित्यकर्म करने के बाद सबसे पहले मन में भगवान विष्णुजी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। फिर, घर के मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं। अब चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। फिर, चारों और गंगाजल का छिड़काव करें। एक लोटे में पवित्र जल लेकर उसमें अक्षत, तिल और रोली मिला लें। भगवान विष्णु का अभिषेक करने के बाद उन्हें और देवी लक्ष्मी को धूप, दीप दिखाएं और ताजे पुष्प अर्पित करें। विधि-विधान से पूजा-आरती करें और साथ ही, अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। इसके बाद, तुलसी जल और तिल का भोग मंदिर में लगाएं। एकादशी तिथि पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और रात्रि में श्रीहरि के भजन व जागरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं।
अजा एकादशी के दिन करें ये अचूक उपाय
तुलसी पूजन और जल अर्पित करना
एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के सामने शाम के समय घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी दल सुबह ही तोड़ लें और शाम को जल न चढ़ाएं।
पीली वस्तुओं का दान
अजा एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीले वस्त्र, केले, चना दाल, केसर या पीली मिठाइयों का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
मां लक्ष्मी को खीर का भोग
शाम की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को मखाने या चावल की खीर में तुलसी दल डालकर भोग लगाएं. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और धन संबंधी रुकावटें समाप्त होती हैं।
विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ
इस दिन अजा एकादशी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें. साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।





