7 सितंबर को अघासुर वध एवं दही हांडी प्रतियोगिता का आयोजन
लखनऊ। मित्तल परिवार की ओर से अमीनाबाद रोड स्थित न्यू गणेशगंज में 4 से 9 सितम्बर तक चलने वाले छ्ह दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं डिजिटल मूविंग झांकियां प्रदर्शित की जा रही है। झांकी संयोजक अनुपम मित्तल ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डिजिटल मूविंग झांकियों के तीसरे दिन श्रीकृष्ण की गौचारण लीला का प्रसंग दिखाया गया। वृंदावन में श्रीकृष्ण, बड़े भाई बलराम और ग्वाल-बालों के साथ गायों को चराने जंगल गए थे। कान्हा हाथ में बाँसुरी, कंधे पर कंबल और सिर पर मोरपंख धारण किया था। उनके पीछे-पीछे गायों का सुंदर झुंड चलता था। वृंदावन के वन में श्रीकृष्ण गायों को हरी घास चराते, मधुर बाँसुरी बजाते और ग्वाल-बालों के साथ खेलते थे। उनकी बाँसुरी की धुन सुनकर गायें अपना चारा छोड़ देतीं और प्रेम से कान्हा के पास आ जातीं। पेड़-पौधे, पक्षी और नदी तक उनकी धुन में मग्न हो जाते थे। गौचारण लीला यह संदेश देती है कि भगवान श्रीकृष्ण को गायों, प्रकृति और सभी जीवों से गहरा प्रेम था। वे सबके पालनहार हैं और सच्चे प्रेम से पुकारने पर अपने भक्तों के पास अवश्य आते हैं।
वहीं अन्य झांकियों में सावन में झूला झूलते राधा कृष्ण, बाबा अमरनाथ के दर्शन, भक्त शिरोमणि हनुमान जी के हृदय में राम सीता के दर्शन की स्वचालित झांकी भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही। भालू-बंदर नचाते और सांप का खेल दिखाते मदारी की झांकी के साथ राम नाम जपते तुलसीदास, माखन चोरी करने पर कन्हैया को छड़ी लेकर दौड़ाती यशोदा माता की चलती फिरती झांकी भक्तों को लुभा रही थी। 20 फिट ऊंचे शिवलिंग से गंगा अवतरण का सेल्फी कार्नर भी बनाया गया था। डिजिटल मूविंग झांकी लाइट एंड साउंड के इफेक्ट के साथ स्वचालित मूर्तियां एक्शन करती हुई दिखाई दे रही थी जो सभी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। न्यू गणेशगंज झांकी स्थल को फूल पत्तियों, खूबसूरत आकृतियों की कोलकाता की एलईडी लाइट पैनल, झूमर, रंग बिरंगी झालरों एवं विशालकाय तोरण द्वारों पर कृष्ण के विविध रूपों को लखनऊ के मशहूर अग्रवाल इलेक्ट्रिकल, चौक के अंकुल जी द्वारा उकेरा गया था।





