आज लोग उन ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों का भले खूब मजाक उड़ा रहे हों, जिन्होंने साल 2020 की शुरूआत में अनगिन लोगों को नौकरी पाने और उनके अच्छे दिन आने की भविष्यवाणी की थी। लेकिन सिर्फ ज्योतिषाचार्य ही अपनी भविष्यवाणियों को लेकर औंधे मुंह नहीं गिरे, हकीकत तो यह है कि साल 2020 में बड़े पैमाने पर नौकरियों के आगमन और विकास की बात कई बड़ी रोजगार कंसल्टेंसी कंपनियों ने भी कही थी।
इस तरह ये तमाम संस्थाएं और कंपनियां भी ज्योतिषियों की ही तरह साल 2020 में औंधे मुंह गिरी हैं। साल की शुरु आत में कई बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों ने 2020 को नये सपनों की उड़ान वाला साल बताया था। लेकिन रोजगार के लिहाज से साल 2020 जितना हाहाकारी साबित हुआ है, उतना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अभी तक कोई दूसरा साल नहीं साबित हुआ।
यह बात सिर्फ भारत के लिए ही सही नहीं है बल्कि दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है, जिसके लिए साल 2020 भयानक बेरोजगारी का साल साबित न हुआ हो। फिर चाहे भले वहां कोरोना संक्रमण की कैसी भी स्थिति रही हो। हिंदुस्तान के लिए तो साल 2020 वाकई में रोजगार के लिहाज से एक ऐसा दु:स्वप्न है, जिसे कोई भारतीय कभी नहीं याद रखना चाहेगा।
जनवरी, फरवरी में रोजगार पैदा होने की दर 2.5 से करीब 3.5 फीसदी के आसपास थी और उम्मीद की जा रही थी कि इस साल के बजट के बाद नौकरियों की बूम आ जायेगी। लेकिन नौकरियों के बजाय कोरोना आ गया है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद 25 मार्च 2020 को जैसे ही 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई, रोजगार की तमाम संभावनाओं को एक झटके में ताला लग गया।
अप्रैल में जब सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईआई) की सर्वे रिपोर्ट आयी तो यह दिल तोड़ देने वाली थी, क्योंकि मार्च में जो बेरोजगारी 6 से 8.74 प्रतिशत थी, वह एक झटके में बढ़कर 23.52 फीसदी हो गई। इस साल के लिए विशेष भविष्यवाणी की गई थी कि अप्रैल, मई में रियल स्टेट क्षेत्र कम से कम 20 लाख से ज्यादा नये रोजगार पैदा करेगा, क्योंकि रेरा में दर्ज कम से कम 3000 हाउसिंग कंपनियों को इस साल अपने करीब 20,000 हाउसिंग निर्माण के कमिटमेंट पूरे करने थे।
लेकिन 25 मार्च को जब पूरी तरह से हर चीज में लॉक लग गया, तो रोजगार के क्षेत्र की इस बड़ी संभावना एक झटके में खत्म हो गई। यह अकेली बुरी खबर नहीं थी। इस साल एयरलाइंस क्षेत्र से भी कम से कम एक से दो लाख नौकरियों के निकलने की उम्मीद थी, जबकि टूर और ट्रैवलिंग के क्षेत्र से माना जा रहा था कि 3 से 4 लाख नयी नौकरियां सृजित होंगी, क्योंकि विभिन्न टूर ऑपरेटिंग कंपनियों के पास गर्मियों में जो टूर की बुकिंग थी, वह 10 से 12 लाख लोगों की एडवांस में थी।





