लखनऊ। सितंबर का महीना व्रत-त्योहार के मामले में इस बार बहुत खास और महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि, इस दौरान कई बड़े व्रत-त्योहार पड़ेंगे। इस माह की शुरूआत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से होगी। वहीं, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और पद्मा एकादशी का व्रत भी सितंबर में ही रखा जाएगा। महीने के अंत में पितृपक्ष का आरंभ होगा। इन व्रत और त्योहारों को हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व बताया गया है। सितंबर के सभी व्रत-त्योहार की तारीख जानने के लिए आइए विस्तार से देखें की कब कौन-कौन सा व्रत और त्योहार पड़ेगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 4 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने द्वापर युग में माता देवकी और पिता नंदन के घर अवतार लिया था। ऐसे में जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा करने का विधा होता है।
अजा एकादशी
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। अजा एकादशी का महात्म्य पद्मपुराण में भी बताया गया है। इस बार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को किया जाएगा।
पिठोरी अमावस्या
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। वहीं, इस दिन पितरों की पूजा के लिए कुश इकट्ठा किया जाता है और सालभर पूजा में इन्हें ही प्रयोग करते हैं। इसी के चलते इसे कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल यह तिथि 10 सितंबर, गुरुवार को पड़ रही है।
हरतालिका तीज
भाद्रपद मास की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है। इस बार यह तिथि 14 सितंबर, सोमवार को पड़ रही है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
गणेश चतुर्थी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होता है। यह त्योहार पूरे 10 दिन तक चलता है। बता दें कि इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को है। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
कलंक चतुर्थी
भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि को कलंक चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शुरूआत से लेकर चतुर्थी तिथि की समाप्ति तक चंद्र दर्शन को पुराणों में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मिथ्या कलंक यानी झूठे आरोप लगने की आशंका रहती है। इस बार कंलक चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को पड़ रही है।
महालक्ष्मी व्रत आरंभ
श्रीमहालक्ष्मी व्रत भाद्रपद माह में रखा जाता है। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी का व्रत और पूजा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। साथ ही, अधूरे अटक काम भी पूरे हो सकते हैं। महालक्ष्मी का व्रत इस बार 18 सितंबर, शुक्रवार से शुरू हो रहा है जो पूरे 16 दिनों तक रखा जाएगा।
राधाष्टमी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में इस दिन विधि-विधान से राधा रानी की पूजा की जाती है। इस बार राधाष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
पद्मा एकादशी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। बता दें कि इस साल पद्मा एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को किया जाएगा।
वामन जयंती
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाती है। इस बार यह तिथि 23 सितंबर, बुधवार के दिन पड़ रही है। मान्यता है कि इसी दिन श्रवण नक्षत्र के अभजिीत मुहूर्त में श्रीहर िका वामन अवतार में प्रकाट्य हुआ था। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी के साथ ही गणेश उत्सव का समापन होता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त बप्पा की विधि-विधान से पूजा करने के बाद उन्हें विदा करते हैं। गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को विराजमान करने के बाद उन्हें डेढ़, ढाई, पांच, सात या फिर 11 दिनों तक घरों में विराजमान किया जाता है।
प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि प्रोष्ठपदी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन पितरों की पूजा, तर्पण, श्राद्ध आदि कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल प्रोष्ठपदी पूर्णिमा 26 सितंबर, शनिवार के दिन पड़ रही है।
पितृपक्ष आरंभ
इस बार पितृपक्ष की शुरूआत 27 सितंबर, रविवार से हो रही है। कहा जाता है कि इस दौरान पितृ धरती पर अपने परिवारजनों के पास आते हैं। ऐसे में उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण आदि कार्य कराने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है। साथ ही, सुख-शांति के संयोग बनते हैं।





