लखनऊ। पति की दीघार्यु और समृद्धि की कामना के पर्व कजरी तीज पर सोमवार को महिलाओं ने व्रत कर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा की। घरों में केले के पत्ते से मंडप बनाकर गौरी गणेश की पूजा की गई।
कजरी तीज पर व्रती महिलाओं ने स्नान के बाद भगवान शिव और माता गौरी की मिट्टी की मूर्ति बनायी और माता गौरी और भगवान शिव की मूर्ति को एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित किया। इसके बाद माता गौरी को सुहाग के 16 सामग्री अर्पित की, और भगवान शिव को बेल पत्र, गाय का दूध, गंगा जल, धतूरा, भांग आदि चढ़ाया। उसके बाद धूप और दीप आदि जलाकर आरती करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की कथा सुनी और विधि विधान से पूजा-अर्चना की। मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि की ओर से पूजन का आयोजन किया है। मां गौरी स्वरूप कजरी की आकृति बना कर व्रती महिलाओं ने पूजन किया। पूजन के दौरान महिलाएं हरे रंग की साड़ी धारण किये हुए थीं।
राजेन्द्र नगर के महाकाल मंदिर में भी महिलाओं ने पूजन किया। संयोजक अतुल कुमार मिश्रा ने बताया कि मंदिर को हरे रंग की रोशनी से सजाया गया था। इंद्रलोक कॉलोनी के इंद्रेश्वर और तुलसी मानस मंदिर में भी पूजन किया गया। आशियाना में पूजा मेहरोत्रा की ओर से पूजन किया गया। पति अमित मेहरोत्रा ने कजरी की कथा सुनाई। महानगर में अनुराधा की ओर से पूजन किया गया।
इसलिए मनायी जाती है कजरी तीज:
कजरी तीज मुख्य रूप से दांपत्य जीवन में मधुर संबंधों पर आधारित पर्व है। पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि इस पर्व को लेकर ये पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने सालों तक अपने कठोर तप से भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। तभी से मान्यता अनुसार सभी शादीशुदा महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति हेतु व अपने पति की दीघार्यु के लिए निर्जल रहकर इस दिन मां पार्वती के लिए व्रत करती हैं। इसके साथ ही इस दिन अविवाहित कन्याएं भी भगवान शिव की भांति वर पाने और जल्द विवाह की कामना से इस व्रत को रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिलाओं के व्रत से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। ऐसी भी माना जाता है कि अगर किसी लड़की की शादी में कोई बाधा आ रही है तो इस व्रत को जरूर रखे।





