- 223 ग्राम पंचायतों में होगा विस्तार, प्रदेश स्तर पर ले रहा आकार अभियान
लखनऊ। सरोजनीनगर में वर्ष 2022 में शुरू की गई डिजिटल शिक्षा और डिजिटल लाइब्रेरी की पहल अब प्रदेश के गांवों तक विस्तार लेने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी विकसित किए जाने की योजना का सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा संसाधनों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि 25 जुलाई 2022 को सरोजनीनगर में डिजिटल शिक्षा अभियान की शुरूआत की गई थी। इसके तहत 37 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए, जिससे 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा संसाधनों का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया गया। विधायक के मुताबिक प्रदेश सरकार की डिजिटल लाइब्रेरी विकास योजना के तहत कुल 223 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इनमें से 113 ग्राम पंचायतों में किताबें और फर्नीचर पहुंच चुके हैं, जबकि अगले चरण में आईटी उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी है।
डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए ग्रामीण विद्यार्थियों को किताबों के साथ आॅनलाइन शैक्षणिक सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और विभिन्न डिजिटल संसाधनों तक पहुंच मिल सकेगी। इससे गांवों में ही बेहतर अध्ययन का माहौल तैयार होने और विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए शहरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में 2022 में जनसहभागिता के साथ शुरू की गई डिजिटल शिक्षा की परिकल्पना को अब प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचते देखना संतोष की बात है।
उन्होंने इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी सिर्फ किताबों तक पहुंच का माध्यम नहीं होगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं को तकनीक, आॅनलाइन शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जोड़ने का प्रभावी केंद्र बन सकती है।
इससे गांव के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध होंगे। विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश शिक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार ग्रामीण युवाओं को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।





