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श्रद्धा व सत्कार से मनाया गया श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व

लखनऊ। राजधानी के सभी गुरुद्वारों में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा व सत्कार के साथ मनाया गया। इसी क्रम में गुरुद्वारा सदर, लखनऊ में आज साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा परिसर गुरु की पवित्र बाणी और शबद-कीर्तन से गूंज उठा। बड़ी संख्या में संगत ने गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर माथा टेका और गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया। कीर्तन से हुआ दीवान का शुभारंभ कार्यक्रम के दीवान का शुभारंभ भाई गुरविंदर सिंह जी द्वारा आसा दी वार के मधुर कीर्तन से किया गया। कीर्तन के माध्यम से संगत को गुरु साहिब की पावन बाणी से जोड़ते हुए नाम-सिमरन और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। ज्ञानी हरविंदर सिंह जी ने बताया श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का गौरवशाली इतिहास इसके उपरांत ज्ञानी हरविंदर सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के इतिहास, स्वरूप और आध्यात्मिक महत्व पर कथा-विचार करते हुए संगत को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को प्रारंभ में आदि ग्रंथ साहिब कहा जाता था। पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने सिख गुरुओं, भगतों और भट्टों की पवित्र वाणी को एकत्रित एवं संपादित कर आदि ग्रंथ साहिब का स्वरूप तैयार कराया। सन 1604 में श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में इसका प्रथम प्रकाश हुआ। ज्ञानी जी ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन बाणी 31 रागों में संकलित है। इसका आरंभ राग श्री से होता है और अंतिम राग जैजावंती है। गुरबाणी मानवता को नाम-सिमरन, सत्य, प्रेम, सेवा, समानता और सदाचार का मार्ग दिखाती है। उन्होंने आगे बताया कि सन 1708 में नांदेड़ साहिब में दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की बाणी को आदि ग्रंथ साहिब में सम्मिलित करवाकर इसके स्वरूप को पूर्णता प्रदान की। इसके पश्चात श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को शाश्वत गुरु का पद प्रदान किया। इस प्रकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिख पंथ के सदैव मार्गदर्शक एवं गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुए। गुरु की बाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा : हरपाल सिंह जग्गी इस अवसर पर गुरुद्वारा सदर, लखनऊ के अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह जग्गी ने संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में सरदार जग्गी ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी केवल सिख समाज के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत हैं। गुरु साहिब की पावन बाणी हमें जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम, समानता, सेवा और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि अपने जीवन में गुरु की शिक्षाओं को अपनाने और मानवता की सेवा का संकल्प लेने का अवसर है। हमें गुरु साहिब की बाणी को केवल पढ़ना और सुनना ही नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारना चाहिए। सरदार जग्गी ने संगत से आह्वान किया कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने तथा जरूरतमंदों की सहायता एवं मानवता की सेवा के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। प्रमुख रूप से रहे उपस्थित इस पावन कार्यक्रम में मुख्य रूप से सरदार सुरेंद्र सिंह गोलू, सरदार नरेंद्र सिंह छाबड़ा, सरदार परमजीत सिंह छाबड़ा, सरदार तेजपाल सिंह रोमी (पूर्व अध्यक्ष, गुरुद्वारा सदर), जनरल सेक्रेटरी जसविंदर सिंह बेदी, सरदार इंद्रजीत सिंह खालसा (पूर्व अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष), सरदार कुलबीर सिंह कोहली स जसविंदर सिंह बेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

नाका गुरुद्वारा : शब्द चौकी का आयोजन
लखनऊ। श्री गुरु सिंह सभा लखनऊ नाका हिंडोला में शनिवार को बड़ी श्रद्धा सत्कार धूमधाम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व मनाया गया जिसमे श्री दरबार साहिब से भाई सिमरनजीत सिंह जी अमृतसर ने संगत को गुरु के शब्दों से निहाल किया। इस विशेष अवसर पर सिख सेवक जत्था द्वारा एक शब्द चौकी का आयोजन किया गया जिसमे मनमीत सिंह जी हरमिंदर सिंह जी दलजीत सिंह जी देवेंद्र पाल सिंह जी कुलवंत सिंह जी कुलदीप सिंह जी उपस्थित रहे। गुरुद्वारा अध्यक्ष डॉ अमरजोत सिंह महामंत्री मनमीत सिंह ने सारी संगतों को गुरु महाराज के पहला प्रकाश पूरब की बधाइयाँ प्रेषित की एवं सबसे गुरु महाराज के उपदेशों पर चलने के लिए प्रेरित किया। यह प्रोग्राम 10 सितंबर से चल रहा था एवं शहद चौकी का प्रबंध सिख सेवक जथा द्वारा किया गया। सरदार परविंदर सिंह एवं सरदार हरपाल सिंह जग्गी को सम्मानित किया गया। 18 सितंबर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश को समर्पित एक आयोजन भी रखा गया है जिसमे ज्ञानी शेर सिंह जी एवं 2 रागी जथे विशेष तौर पर शाम को दीवान सजायेंगे।

गुरुद्वारा यहियागंज : शबद कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व आज 12 सितंबर शाम को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ गुरमीत सिंह के संयोजन में इस अवसर पर विशेष रूप से श्री दरबार साहब श्री अमृतसर से आए भाई सिमरनजीत सिंह जी एवं हजूरी रागी भाई करनैल सिंह जी ने शबद कीर्तन द्वारा संगतो को निहाल किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब को विशेष रूप से सजाया गया था। इस अवसर पर हेड ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने बताया श्री गुरु ग्रंथ साहिब की संपादना सिखों के 5वें गुरु श्री गुरु अर्जुनदेव द्वारा की गई। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु अर्जुनदेव ने अपने से पहले चारों गुरुओं द्वारा रची गई वाणी, अपनी गुरुवाणी, उस वक्त के निर्गुण विचारधारा के 15 भक्तों की वाणी, गुरु घर के अनन्य सेवक बलवंत जी, सुन्दर जी और 11 भट्टी की वाणी का समावेश किया गया। गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी में मुल्तानी, पंजाबी, हिन्दी, सिंधी, मराठी, व्रज, गुजराती, अरबी, फारसी भाषाओं का समावेश है। माना जाता है प्रभु परमात्मा द्वारा जो वाणी गुरुओं को सुनाई गई थी, वही गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी में मौजूद है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर सहित देश भर में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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