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लड्डू गोपाल की छठी आज, मंदिरों व घरों में होगी पूजा

लखनऊ। बुधवार 9 सितंबर को कृष्ण की छठी मनाई जाएगी। छठी के दिन शहर के मंदिरों व घरों में कान्हा की विशेष पूजा अर्चना की जायेगी। हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का बहुत महत्व है। 16 संस्कारों की शुरूआत गर्भ से शुरू हो जाता है। फिर जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार पूरे किये जाते है। ये संस्कार मनुष्य और देव दोनों के लिए होता है। जैसे हम अपने बच्चे के लिए छठी मनाते है। वैसे ही कृष्ण की भी छठी मनाई जाती है। इस दिन लोग लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और कान्हा के नामकरण संस्कार को पूरा करते हैं। कान्हा की छठी भी जन्माष्टमी के छठे दिन ही मनाई जाती है। इस दिन लोग घरों में कढ़ी चावल बनाकर भोग लगाते है और खाते है।

लड्डू गोपाल की छठी का महत्व:
हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के छह दिन बाद षष्ठी देवी की पूजा का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षष्ठी देवी की कृपा से राजा प्रियव्रत का मृतपुत्र दोबारा जीवित हो गया था। पुराणों में षष्ठी देवी को बच्चों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। कहते हैं कि इनकी पूजा करने से नवजात शिशु पर कोई आंच नहीं आती।

लड्डू गोपाल को छठी में किन चीजों का भोग लगाना चाहिए:
भगवान कृष्ण की छठी पर कढ़ी चावल का भोग अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा आप माखन, मिश्री व मालपुआ आदि का भोग लगा सकते हैं।

घी से मालिश, दूध से स्नान
छठी के दिन बाल गोपाल को बच्चे की तरह प्यार से स्नान कराने की परंपरा है. इस दिन पहले कान्हा की घी से हल्की मालिश करें और फिर उन्हें दूध से स्नान कराएं. इसके बाद साफ जल से स्नान कराकर सुंदर वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें. मान्यता है कि इस तरह बाल कृष्ण की सेवा करने से भक्त का वात्सल्य भाव प्रकट होता है और पूजा में प्रेम जुड़ता है।

कान्हा का करें खास श्रृंगार
छठी के दिन सबसे पहले लड्डू गोपाल को स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं और उनका सुंदर श्रृंगार करें. मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, माला और फूलों से बाल गोपाल को सजाया जा सकता है. चंदन का तिलक लगाकर उन्हें नए वस्त्र पहनाएं. बाल कृष्ण को बच्चे की तरह सजाने की परंपरा भक्तों के वात्सल्य और प्रेम भाव से जुड़ी है. इस दिन कान्हा के श्रृंगार को खास महत्व दिया जाता है।

कान्हा को लगाएं काजल
कृष्ण की छठी से जुड़ी लोक परंपराओं में बाल गोपाल को काजल लगाने की मान्यता भी मिलती है. माना जाता है कि इससे कान्हा की नजर उतारी जाती है. हालांकि इसे अनिवार्य पूजा नियम नहीं माना जाना चाहिए. अगर आप अपने घर की परंपरा के अनुसार काजल लगाते हैं, तो प्रतीकात्मक रूप से लगा सकते हैं. खासकर छोटे बच्चों की तरह बाल कृष्ण का श्रृंगार करना भक्तों के वात्सल्य भाव को दर्शाता है।

लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं
छठी उत्सव में बाल कृष्ण को झूला झुलाने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है. इसके लिए फूलों से सजा छोटा पालना या झूला तैयार किया जा सकता है. लड्डू गोपाल को उसमें विराजमान कर परिवार के सदस्य बारी-बारी से झूला झुलाएं. इस दौरान कृष्ण के बाल स्वरूप के भजन और सोहर गाए जा सकते हैं. यह रस्म कान्हा के जन्म की खुशी और वात्सल्य भाव से जुड़ी है।

कढ़ी-चावल का लगाएं भोग
कान्हा की छठी पर कई परिवारों में कढ़ी-चावल का विशेष भोग लगाने की परंपरा है. इसके अलावा माखन-मिश्री, फल, दूध, दही और मिठाई भी अर्पित की जा सकती है. कढ़ी-चावल को लेकर क्षेत्र और परिवार के अनुसार परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए इसे अनिवार्य शास्त्रीय नियम न मानें. घर की रीति के अनुसार सात्विक भोजन तैयार करें और श्रद्धा से बाल गोपाल को भोग लगाएं।

सोहर गाएं और नजर उतारें
छठी के मौके पर कान्हा के जन्म की खुशी में सोहर गाने और उनकी नजर उतारने की लोक परंपरा भी कई जगह प्रचलित है. परिवार की महिलाएं मिलकर कृष्ण जन्म के मंगल गीत और सोहर गा सकती हैं. नजर उतारने की रस्म भी अपने परिवार की परंपरा के अनुसार की जा सकती है. इन सभी रस्मों का मुख्य भाव बाल कृष्ण के प्रति प्रेम, श्रद्धा और वात्सल्य प्रकट करना है।

पूजा की विधि:
जिस दिन कान्हा की छठी मनाई जाती है उस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें, कृष्ण का पसंदीदा पंचामृत से लड्डू गोपाल को स्नान कराया जाता है। स्नान करवाते समय लड्डू गोपाल के मुख के तरफ से स्नान करवाये, ध्यान रहें पीठ की तरफ से स्नान करना वर्जित है। फिर शंख में गंगाजल भरकर लड्डू गोपाल से स्नान कराया जाता है। उसके बाद भगवान को पीले रंग के वस्त्र पहना कर श्रृंगार किया जाता है। काजल का टीका लगाया जाता है। फिर लड्डू गोपाल को माखन.मिश्री भोग लगाया जाता है। कृष्ण के नामों में से कोई एक नाम से नामकरण किया जाता है। इसके बाद कढ़ी.चावल का भोग लगाया जाता है और प्रसाद स्वरुप खाया जाता है। इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में धन.धान्य का भंडार भरा रहता है।

लड्डू गोपाल की छठी के दिन क्या करें:
इस दिन सुबह से शाम तक भजन कीर्तन करें। झूठ ना बोले और न कोई अपराध करें। ईष्या द्वेष से खुद को दूर रखें। दूसरों को भोजन करायें और गौ सेवा करें। जन सरोकार के लिए सुख.सुविधाओं के त्याग की भावना मन में रखें । इस दिन घर में बांसूरी जरूर लाएं। लड्डू गोपाल की छठी के दिन कुंटूंब जनों को प्रसाद वितरण करें। मांस मदिरा के सेवन से दूर रहें और दुष्टजनों का त्याग करें। माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा का सकंल्प ले। घर से किसी को भी खाली हाथ न जाने दें।

खाटू श्याम मंदिर में श्री कृष्ण छठी महोत्सव आज:
श्री श्याम भक्त परिवार की ओर से श्री श्याम परिवार के सान्निध्य में श्री कृष्ण छठी महोत्सव का आयोजन 9 सितंबर को श्री खाटू श्याम मंदिर, बीरबल साहनी मार्ग, लखनऊ में किया जायेगा। मीडिया प्रभारी मोहित मित्तल ने बताया कि भक्त परिवार द्वारा बाबा श्याम का उत्सव बहुत ही प्रेम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। मीडिया प्रभारी मोहित मित्तल ने बताया कि उत्सव का शुभारम्भ शाम 7 बजे श्री श्याम प्रभु खाटू वाले के पूजन से किया जायेगा भक्त परिवार के प्रेम अग्रवाल ने बताया कि मंदिर प्रांगण को कोलकाता के कारीगरों द्वारा कोलकाता से विशेषतौर पर मंगाये गये रंग-बिरंगे, देशी-विदेशी फूलों, रंग-बिरंगी चमचमाती लाइटों, रंगीन गुब्बारों, विभिन्न प्रकार की टॉफियों एवं खिलौनों से सजाया जाएगा जोकि आकर्षण का केंद्र होगा। मध्यरात्रि में बाबा श्याम को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा जो आरती होने के तत्पश्चात भक्तों में बांट दिया जाएगा। भक्त परिवार के मीडिया प्रभारी मोहित मित्तल ने बताया कि उत्सव का समापन श्याम प्रभु से फूलों की होली के बाद प्रभु की महाआरती से होगा उन्होंने बताया कि हर भक्त को प्रसाद मिले इसके लिये भक्त परिवार द्वारा विशेष व्यवस्था की जा रही है।

श्याम मंदिर में भजन संध्या:
बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मंदिर में श्री कृष्णा छठी उत्सव पर श्री श्याम भक्त परिवार द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया । श्री श्याम परिवार महामंत्री रुपेश अग्रवाल ने बताया कि सुप्रसिद्ध भजन गायिका उदयपुर से केमिता राठौर, लखनऊ से धीरज तिवारी, उड़ीसा से शुभांगी सोनी ने भजनों का गुलदस्ता श्री श्याम के चरणों में पेश किया।

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