लखनऊ। भगवान गणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय देवता और विघ्नों का नाश करने वाला माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत से पहले गणपति की आराधना करने की परंपरा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से देशभर में गणेश उत्सव का शुभारंभ होता है। इस दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश चतुर्थी के नजदीक आते ही भक्तों में उत्साह बढ़ने लगता है। बाजारों में सजावट और पूजा सामग्री की खरीदारी शुरू हो जाती है, वहीं जगह-जगह गणेश पंडाल सजाए जाने लगते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गणपति की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन अगले दिन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत और गणपति स्थापना 14 सितंबर को ही की जाएगी।
गणेश स्थापना की तिथि: 14 सितंबर 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
गणपति पूजा का शुभ समय: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
कब होगा गणपति विसर्जन?
गणेश उत्सव के समापन पर गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। इसी दिन बड़े स्तर पर गणपति विसर्जन किया जाएगा। हालांकि, हर परिवार और क्षेत्र में विसर्जन की अलग परंपराएं हो सकती हैं। कई भक्त डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन या 7 दिन बाद भी गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं सार्वजनिक गणेश उत्सवों में आमतौर पर अनंत चतुर्दशी के दिन भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाती है।
कैसे करें गणपति स्थापना ?
सबसे पहले गणपति स्थापना के स्थान की साफ-सफाई करें, फिर चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें। पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें आचमन और पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को रोली, अक्षत, सिंदूर, फल, फूल और दूर्वा अर्पित करें। पूजा का दौरान ऊं गं गणपतये नम: का जाप करें, फिर आरती और कथा सुनें।
गणेश जी को अर्पित करें दूर्वा
भगवान गणेश को दूर्वा घास बहुत ही प्रिय होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा में दूर्वा की गांठें बनाकर भगवान गणेश को अर्पित करना शुभ होता है। इसके अलावा भगवान गणेश को मोदक भी काफी प्रिय होता है जिसे जरूर अर्पित करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर क्यों है चंद्रमा देखना वर्जित
भाद्रपद माह की चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करना वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है। इससे भगवान कृष्ण से जुड़ी कथा प्रचलित है।





