श्रद्धा व सत्कार से मना गुरु हरि राय साहिब जी का प्रकाश पर्व
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु हरि राय साहिब जी का प्रकाश पर्व आज शाम 7:00 बजे से 11:00 बजे तक बड़ी श्रद्धा से मनाया गया।
गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉक्टर गुरमीत सिंह के संयोजन में विशेष रूप से लुधियाना से आए भाई पवनदीप सिंह कानपुरी ने शबद कीर्तन कहो कबीर हम राम राखे किरपा कर हर राये…, हक परवर हक केश करता हर राये…,सुल्तान हम दरवेश गुरु करता हर राये… द्वारा संगतों को निहाल किया। भाई पवनदीप सिंह कानपुरी ने बताया कि गुरु हर राय का जन्म अनंति (जिसे निहाल के नाम से भी जाना जाता है) और बाबा गुरदित्ता के घर सोढ़ी खत्री परिवार में हुआ था। जब वे 8 साल के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। 1640 में 10 साल की उम्र में, गुरु हर राय का विवाह माता किशन देवी (जिन्हें कभी-कभी सुलखनी के नाम से भी जाना जाता है) से हुआ, जो दया राम की बेटी थीं। उनकी एक बेटी रूप कौर और दो बेटे, राम राय और हर कृष्ण (जिनमें से बाद वाले आठवें गुरु बने) थे। उन्होंने सिख धर्म में कई सार्वजनिक गायन और शास्त्र वाचन परंपराएँ शुरू कीं। गुरु हर राय ने सिखों की सबद कीर्तन गायन परंपरा में कथा या प्रवचन शैली के गायन को जोड़ा। उन्होंने सिख धर्म की अखंड कीर्तन या निरंतर शास्त्र गायन परंपरा के साथ-साथ जोतियन दा कीर्तन या शास्त्रों के सामूहिक लोक गायन की परंपरा को भी जोड़ा। कार्यक्रम समाप्ति पर गुरु का अटूट लंगर एवं मिष्ठान प्रसाद वितरित किया गया।





