एसएनए के वाल्मीकि रंगशाला में नाटक का मंचन
लखनऊ। इमेंस आर्ट एंड कल्चरल सोसाइटी के तत्वावधान में नाटक हम तुम का मंचन एसएनए के वाल्मीकि रंगशाला में किया गया। नाटक का निर्देशन सुदीप ने किया। यह नाटक एक काल्पनिक दुनिया की कहानी है, जहां पारंपरिक मूल्यों और आधुनिकता के बीच संघर्ष दिखाया गया है। कहानी मुख्य रूप से समाज के पुराने रीति-रिवाजों और नई सोच के टकराव पर आधारित है। कहानी के केंद्र में एक युवा व्यक्ति है जो अपनी पुरानी परंपराओं और आधुनिक जीवनशैली के बीच फंसा हुआ है। उसके परिवार और समाज की अपेक्षाएँ उसे पुराने तरीकों से जीने पर मजबूर करती हैं, लेकिन उसका दिल नई दुनिया के सपनों की ओर आकर्षित होता है। नाटक में रिश्तों की उलझनों, पहचान की खोज, और समाज के नियमों की सीमाओं पर गहराई से प्रकाश डाला गया है। यह एक ऐसा सफर है, जिसमें नायक अपने अस्तित्व के सही अर्थ को खोजने का प्रयास करता है, और यह समझने की कोशिश करता है कि क्या वास्तव में पुराने और नए का मेल संभव है।
‘ओल्ड वर्ल्ड’ एक रूसी नाटककार अलेक्सी अबुर्जोव द्वारा लिखित नाटक है, जिसका हिंदी रूपांतरण ‘हम तुम’ नाम से प्रस्तुत किया गया है। यह नाटक दो वृद्ध व्यक्तियों की कहानी है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में एक-दूसरे से मिलते हैं और उनके बीच एक अनोखा संबंध विकसित होता है।
नाटक की पृष्ठभूमि एक सैनिटोरियम (स्वास्थ्य केंद्र) है, जहां 61 वर्षीय डॉक्टर सरदार सिंह भुल्लर अपने एकाकी जीवन में व्यस्त हैं। उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, और उनकी बेटी बैंगलोर में रहती है, जो उनसे मिलने नहीं आती। एक दिन, 55 वर्षीय महिला सरिता उस सैनिटोरियम में भर्ती होती हैं। सरिता जीवन से भरपूर, उत्साही और स्वतंत्र विचारों वाली महिला हैं, जो डॉक्टर भुल्लर के शांत जीवन में हलचल पैदा करती हैं।
शुरूआत में, डॉक्टर भुल्लर सरिता की चंचलता और स्वतंत्रता से परेशान होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वे उनकी जीवन के प्रति उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रभावित होते हैं। भुल्लर डॉक्टर को उनके एकाकी जीवन से बाहर निकालकर जीवन का आनंद लेने के लिए प्रेरित करती हैं। दोनों के बीच एक गहरा संबंध विकसित होता है, जो यह दशार्ता है कि जीवन के किसी भी पड़ाव घर प्रेम और मित्रता संभव है। ये नाटक इमेन्स आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी और रामादेवी चेरिटेबल ट्रस्ट और संगीत नाटक अकादमी के रस मंच योजना के अंतर्गत लखनऊ के वाल्मीकि प्रेक्षागृह में खेल गया इसका नाटक रूपांतरण राहिल भारद्वाज का हैं और निर्देशन सुदीप चक्रवार्ती और इसमें सरदार भुल्लर की भूमिका में गोविंद सिंह यादव और सरिता की भूमिका सुगंध पाण्डेय ने निभायी।





