नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रीय स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (नासवी) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शहर के कई इलाकों में रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे व्यापारियों को अपना कारोबार बंद करने के लिए कहा जा रहा है। संगठन का दावा है कि यह कार्रवाई बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।
नासवी के अनुसार, इंडिया गेट, मदनगीर, भीकाजी कामा प्लेस, वसंत विहार, साकेत और आर.के. पुरम जैसे प्रमुख इलाकों में स्ट्रीट वेंडर्स ने शिकायत की है कि पुलिसकर्मी उन्हें दुकानें लगाने से रोक रहे हैं। कुछ स्थानों पर विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें मौके से हटने के लिए दबाव बनाया गया, जबकि मदनगीर क्षेत्र में कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका सामान जब्त कर लिया गया।
संगठन का कहना है कि यदि यह स्थिति 13 सितंबर तक बनी रहती है, तो इसका सीधा असर उन विक्रेताओं पर पड़ेगा जो रोज कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नासवी ने चिंता जताई कि पहले से ही महंगाई, बढ़ते घरेलू खर्च और अनिश्चित आय के बीच यह अतिरिक्त दबाव उनके लिए बेहद मुश्किल हालात पैदा कर सकता है।
नासवी के राष्ट्रीय समन्वयक अरविंद सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि प्रस्तुत करता है, तब सड़क किनारे काम करने वाले लोगों को “छिपाने” की चीज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये लोग शहर की अर्थव्यवस्था और जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी उपेक्षा करना उचित नहीं है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सुरक्षा व्यवस्थाओं के महत्व को समझता है, खासकर ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इन व्यवस्थाओं के नाम पर गरीब और कमजोर वर्ग की आजीविका को नुकसान न पहुंचे। नासवी का कहना है कि प्रशासन को संतुलन बनाकर काम करना चाहिए ताकि सुरक्षा और आजीविका दोनों प्रभावित न हों।
इस मुद्दे को लेकर नासवी ने संबंधित अधिकारियों से कई मांगें रखी हैं। संगठन ने आग्रह किया है कि किसी भी प्रकार की पाबंदी लगाने से पहले स्ट्रीट वेंडर्स के साथ संवाद स्थापित किया जाए। साथ ही, यदि किसी इलाके में सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से व्यापार बंद करना जरूरी हो, तो प्रभावित विक्रेताओं को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी आय पूरी तरह बंद न हो।
नासवी ने यह भी मांग की कि प्रशासन स्पष्ट और लिखित दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि भ्रम और मनमानी की स्थिति खत्म हो सके। संगठन का कहना है कि मौखिक आदेशों के कारण कई जगहों पर अलग-अलग तरीके से कार्रवाई की जा रही है, जिससे विक्रेताओं में असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है।
दिल्ली में स्ट्रीट वेंडर्स की संख्या लाखों में है, जिनमें से अधिकांश दैनिक आय पर निर्भर हैं। ऐसे में कुछ दिनों के लिए भी काम बंद होना उनके लिए आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संवेदनशीलता और बेहतर योजना बनाकर ही समाधान निकाला जा सकता है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जैसे-जैसे ब्रिक्स सम्मेलन की तारीख नजदीक आ रही है, यह मामला और तूल पकड़ सकता है। ऐसे में सभी पक्षों के बीच संवाद और संतुलित निर्णय ही इस स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।





