लखनऊ। छोटी और आकर्षक गणेश प्रतिमा का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसका सजावट करने वाली महिला सुरेखा ने बताया कि इन छोटी, बड़ी और आकर्षक मूर्तियों को सजाने में भी काफी समय लगता है। घर के काम से समय निकालकर भगवान गणेश की इन प्रतिमाओं को सजाने के लिए गणेश जी को पगड़ी पहनाना, लेस स्टोन जैसी चीजें सजावट करके इन मूर्तियों को आकर्षक रूप दिया जा रहा है।
कई पैटर्न और डिजाइन में तैयार की गयी गणेश प्रतिमा:
मूर्तिकार अमित सेन ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गणेश प्रतिमा का निर्माण कार्य पिछले 2 महीने से किया जा रहा है। 8 इंच से लेकर लगभग 14 फीट तक की गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। मूर्ति की कीमत लगभग 1500 रुपए से लेकर 11 हजार रुपये तक होंगी। मूर्तिकार को उम्मीद है कि इस बार ग्राहकी और बाजार भी अच्छा रहेगा।
इको फ्रेंडली हैं मूर्तियां:
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने उन्हें मूर्ति तैयार करने का आॅर्डर दिया था उनकी मूर्तियां तैयार हो चुकी हैं, जबकि कई लोग एडवांस बुकिंग करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गणेश चतुर्थी पर सभी मूर्तियां इको फ्रेंडली बनाई गई हैं। इन मूर्तियों को कच्ची मिट्टी से बनाया गया है, यानी विसर्जन के वक्त नदी में बहते ही सिर्फ पांच मिनट के अंदर ही यह पूरी मिट्टी की तरह पानी में घुल जाएंगी, जिससे नदी को नुकसान नहीं होगा।
भक्तों को भा रहे कोलकाता और बॉम्बे वाले गणपति
लखनऊ। गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही लखनऊ के बाजारों में बप्पा की धूम है। निरालानगर समेत शहर के तमाम इलाकों में दुकानों पर सजी रंग-बिरंगी गणपति मूर्तियां भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मिट्टी, गोबर, और प्राकृतिक रंगों से बनी ये मूर्तियां न केवल देखने में आकर्षक हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। इस बार भक्तों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में हैं कोलकाता वाले गणपति, बॉम्बे वाले गणपति और डब्ल्यू आकर के गणपति। निरालानगर में दुकान लगाने वाले रामकुमार गौरव ने बताया कि गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार रहता है। यह त्योहार ढेर सारी खुशियां लेकर आता है। पिछले कई सालों से वह मूर्तियां का कारोबार कर रहे हैं। महाराष्ट्र से लेकर कोलकाता जैसे शहरों से मूर्तियां मंगाते हैं। इस बार कई तरह की मूर्तियां आई हैं। इनमें कोलकाता और बॉम्बे वाले गणपति बप्पा की मूर्ति भक्तों की पहली पसंद बनी हुई है। दूसरे दुकानदार ने बताया कि 5,00 लेकर 35,000 तक की गणेशजी की मूर्तियां उनके यहां हैं। भक्तों को डब्ल्यू गणपति जी काफी पसंद आ रहे हैं। इनकी सूड़ पूरी तरह से टेढ़ी है। इस वजह से मूर्ति का नाम डब्ल्यू गणपति पड़ा है। आकार और सजावट के हिसाब से इनकी कीमत अलग-अलग है।
कोलकाता वाले गणपति सादगी की मिसाल:
कोलकाता से आई गणपति मूर्तियां विशेष मिट्टी से तैयार की जाती हैं। इन्हें प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है और गहनों या भारी सजावट से नहीं सजाया जाता। इको-फ्रेंडली मूर्तियां होने की वजह से ये भक्तों की पहली पसंद बन चुकी हैं। शुद्धता और सादगी का ये अनूठा मेल शहर के पर्यावरण-प्रेमी भक्तों को खासा भा रहा है।
बॉम्बे वाले गणपति का शाही अंदाज:
अगर किसी मूर्ति की शाही सजावट देखकर मन खुश हो जाता है, तो वह है बॉम्बे वाले गणपति। इन मूर्तियों की खूबसूरत नक्काशी, चमकदार रंग और बारीक डिजाइन भक्तों को मोहित कर रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, सबसे ज्यादा बुकिंग इन्हीं मूर्तियों की हो रही है। जिन घरों में धूमधाम से बप्पा का स्वागत होता है, वहां बॉम्बे वाले गणपति की डिमांड सबसे अधिक है।





