पटना। बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है और स्थिति अब चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। राजधानी पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर ‘हाईएस्ट फ्लड लेवल’ (एचएफएल) के निशान को पार कर गया है, जिससे निचले इलाकों में खतरा कई गुना बढ़ गया है। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से हाई अलर्ट जारी करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और बचाव तैयारियों को तेज कर दिया है।
राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल में बाढ़ और जलभराव का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, करीब 19.57 लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हैं। हजारों गांवों में पानी घुस चुका है, जिससे लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई जगहों पर घरों में पानी भर गया है, सड़कें टूट गई हैं और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और यह 60 से अधिक प्रखंडों तथा सैकड़ों ग्राम पंचायतों तक फैल चुका है। विशेष रूप से गंगा के किनारे बसे इलाकों में हालात ज्यादा गंभीर हैं, जहां पानी लगातार बढ़ रहा है।
अगले 72 घंटे बेहद अहम
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले तीन दिनों तक स्थिति और बिगड़ सकती है। हाथीदह गेज स्टेशन और उससे नीचे के इलाकों में जलस्तर के और बढ़ने की आशंका जताई गई है। इतना ही नहीं, हाथीदह में गंगा का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड को भी पार कर सकता है। इससे बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
तटबंधों पर चौकसी, 24 घंटे निगरानी
प्रशासन ने सभी तटबंधों और संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। फील्ड इंजीनियरों, जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट पर रखा गया है। जहां भी तटबंध कमजोर पाए जा रहे हैं, वहां तत्काल मरम्मत और मजबूती के काम किए जा रहे हैं।
राहत-बचाव में जुटी टीमें
बाढ़ से निपटने के लिए एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमें प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं। ये टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। नावों और मोटरबोट्स के जरिए फंसे लोगों को निकाला जा रहा है।
कई नदियां उफान पर
गंगा के साथ-साथ गंडक, कोसी, सोन, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती नदियां भी उफान पर हैं।वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज लगभग 1.29 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया।बीरपुर बैराज पर कोसी का डिस्चार्ज 1.73 लाख क्यूसेक।इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डिस्चार्ज 2.27 लाख क्यूसेक। हालांकि कुछ जगहों पर पानी स्थिर है, लेकिन कई इलाकों में खतरे के निशान से ऊपर बहाव जारी है, जिससे हालात और गंभीर बने हुए हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इससे बाढ़ की स्थिति और विकराल रूप ले सकती है।
राहत कार्य तेज, हजारों को मदद
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं।110 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।अब तक 1.98 लाख लोगों को भोजन कराया गया।55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 सूखा राशन पैकेट वितरित।1,345 नावें राहत और बचाव कार्य में लगी हैं।एक राहत शिविर में 326 लोगों के रहने, भोजन और इलाज की व्यवस्था की गई है।इसके अलावा, चिकित्सा टीमों को भी तैनात किया गया है ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण रखा जा सके।
तेजस्वी यादव की मांग
राजनीतिक स्तर पर भी बाढ़ का मुद्दा गर्मा गया है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से इस बाढ़ को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित करने की मांग की है। उन्होंने राज्य के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज और राहत कार्यों के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की अपील की है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि राज्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है और लाखों लोग संकट में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने और तत्काल सहायता देने की मांग की।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
फिलहाल प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने, ऊंचे स्थानों पर जाने तथा सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिन बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इसी दौरान बाढ़ की स्थिति तय करेगी कि हालात कितने गंभीर होंगे।





