बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम मंदिर
लखनऊ। बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम मंदिर परिसर में चल रही भागवत् कथा के दूसरे दिन अयोध्या के कथा व्यास बाल भरत जी महाराज ने भाई भाई के प्रेम की कथा सुनाई। गोकर्ण धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि भाई कैसा भी हो लेकिन यदि वह संकट में हो तो उसकी सहायता करना दूसरे भाई का परम कर्तव्य है वही कार्य गोकर्ण जी महाराज ने किया अर्थात धुंधकारी के घोर पापी होने के पश्चात गोकर्ण जी महाराज ने धुंधकारी के लिए गया श्राद्ध के साथ साथ उसके नाम से श्री मद्भागवत कथा का आयोजन भी किया अत: आज कल छोटी छोटी बातों को लेकर एक एक इंच जमीन को लेकर जो सगे भाई आपस में अदालत में केस लड़ते हैं उनके लिए बहुत बड़ा सन्देश है जबकि धुंधकारी तो गोकर्ण का सगा भाई भी नही था। इसी क्रम में धुंधकारी की मुक्ति की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के पश्चात धुंधकारी को श्री ठाकुर जी ने सारूप्य मुक्ति प्रदान की जो एक पापी प्रेत था लेकिन श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से भगवान के स्वरूप में आ गया जैसा कि श्रीमद्भागवत माहात्म्य में वर्णित है।
बाल भरत जी महाराज ने कहा कि कोई कितना भी बड़ा अपराधी हो दुष्ट हो लेकिन धुंधकारी के जैसे सत्संग में माध्यम से वह अपने आप को बदल सकता है। इसी क्रम में श्रीमद्भागवत कथा सुनने का विधान सुनाया जिसमें वक्ता और श्रोता दोनों के लिए उचित नियम पालन का विधान बताया। कथा के मुख्य यजमान प्रदीप कुमार अग्रवाल ने बताया कि कथा 13 अगस्त तक होगी। श्री श्याम जी अग्रवाल ने बताया कि कथा पांडाल काफी बड़ा होते हुए भी प्रथम दिन में ही लगभग भरा हुआ था।





