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बंगाल : भाजपा की आक्रामक रणनीति के मायने

बिहार में तमाम एग्जिट पोल को गलत साबित करते हुए एनडीए ने जिस तरह फिर से सरकार बनाया है और उसमें भाजपा की प्रमुख भूमिका रही है, उसके कारण भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर बेहद उत्साहित है। जिन दिनों बिहार में विधानसभा चुनावों की गहमागहमी थी, उन दिनों राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने वालों ने देखा कि अमित शाह बिहार के बजाय बंगाल में सक्रि य थे।

कुछ के लिए यह आश्चर्यजनक था और सबके लिए यह भाजपा की नजरों में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के महत्व का द्योतक था। बहरहाल भाजपा ने जिस तरह त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में जीत का परचम फहराकर अपने तमाम वैचारिक विरोधियों को अचंभित कर दिया था, ठीक वैसा ही वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतकर करना चाहती है।

पश्चिम बंगाल और केरल, भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की हमेशा से कमजोर नस रहे हैं। आज तक भाजपा इन दोनों ही राज्यों में अपनी सरकार नहीं बना पायी। केरल की राजनीति में तो उसका अभी भी अछूतों वाला दर्जा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा हर हाल में उलट पलट करना चाहती है।

भाजपा भला ऐसा करने की सोचे भी क्यों न? उसके पास इसके ठोस कारण हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में महज 2 सीटें जीतने वाली और 28 विधानसभा क्षेत्रों में वोटों के नजरिये से सबसे बड़ी पार्टी रहने वाली भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनावों में बिल्कुल उलट पलट करके रख दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने न केवल 18 सीटें जीतीं, जो कि उसके द्वारा जीते गईं पिछले लोकसभा चुनाव से 16 सीटें ज्यादा थीं, बल्कि उसने अपना वोट प्रतिशत भी 2014 के 22.24 की जगह 40.64 फीसदी कर लिया था।

यह बंगाल को अपनी मुट्ठी में समझने वाली टीएमसी के लिए झटका था। हालांकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने भी इन चुनावों में पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले अपने वोट प्रतिशत में 3.48 फीसदी का इजाफा किया था। 2014 में टीएमसी को जहां 40.21 फीसदी मत मिले थे, जो इस बार बढ़कर 43.69 हो गये। लेकिन उसकी सीटें 2014 के मुकाबले 12 घट गई थीं। 2014 में टीएमसी ने 34 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।

इस तरह देखा जाए तो ये 2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े ही हैं, जो भाजपा में जबरदस्त उत्साह का प्रेसर बना रहे हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा ने 28 विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा मत हासिल किये थे, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 122 विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी थीं। हालांकि उसे 2016 के विधानसभा चुनाव में सीटें महज 3 ही मिली थीं।

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