नवरात्र और फिर त्योहारी सीजन में जिस तरह आलू, प्याज और अन्य सब्जियों के दाम अचानक आसमान पर पहुंच गये हैं उससे आम आदमी की थाली से एक साथ दाल, सब्जी, प्याज सब गायब हो गये हैं। लॉकडाउन में काम धंधे गंवा कर बैठे लोग और लॉकडाउन के बाद कारोबार में आयी भारी मंदी के कारण आम आदमी का जीना वैसे ही कठिन हो गया है।
ऊपर से 40 रुपये किलो आलू और अस्सी रुपये किलो प्याज के भाव सुनकर आम आदमी सिर्फ ललचाता रहा, नवरात्र के व्रत में भी आलू खाकर भूख मिटाने की हिम्मत नहीं कर पाया। अगर बाजार में एक -दो सब्जी के दाम चढ़ जायें तो उपभोक्ता अपनी पसंद या च्वाइस से समझौता करके अन्य सब्जियों से काम चलाकर संतोष कर लेता है, लेकिन इस बार जमाखोरों ने कोई मौका नहीं दिया।
एक साथ आलू, प्याज, सब्जी, दाल सबके भाव तान दिये जिससे उपभोक्ता के पास अपनी तंग जेबों को और ढीली करने के अलावा कोई उपाय नहीं बचा। लॉकडाउन, बेरोजगारी और अब कारोबार में मंदी के इस दौर में सरकारी कर्मचारी को छोड़कर अधिकांश लोग इस स्थिति में नहीं हैं कि वह चालीस रुपये किलो आलू या अस्सी रुपये किलो प्याज खरीद कर खा सकें।
ऐसे में ज्यादातर उपभोक्ताओं को मन मनोसकर रह जाना पड़ता है। कई बार भारी बारिश, आपूर्ति में कमी या कम उत्पादन होने के कारण भाव अचानक बढ़ जाते हैं। कई बार प्याज की कीमतें आपूर्ति में कमी या फिर बाढ़ आदि के कारण फसल सड़ने से चढ़ जाती हैं। लेकिन एक साथ प्याज, आलू, अन्य सब्जियों, दालों के भाव बढ़ने से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं दाल में कुछ काला है।
वैसे भी प्रदेश में आलू का पर्याप्त उत्पादन हुआ है और राज्य के कोल्डस्टोरेज में इतना आलू जमा है कि बुआई के बाद भी अगले एक-डेढ़ महीनों में पूरी तरह खत्म नहीं होगा और तब तक नयी फसल बाजार में आ जायेगी। ऐसे में आलू का दाम अचानक बहुत बढ़ जाना और दाल की कीमतों में भी दस-पन्द्रह रुपये की असामान्य तेजी से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं इनकी आपूर्ति करने वालों ने सिंडीकेट बनाकर बाजार में कृत्रिम रूप से कमी उत्पन्न कर दी है। जिससे दाम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
एक बात और है, हाल के वर्षों में सरकारी क्षेत्र में बहुत तेजी से वेतन बढ़े हैं जिससे महंगाई बढ़ी है। महंगाई के कारण शहरों में जीवन यापन की लागत बढ़ी है इसलिए छोटे-छोटे विक्रेता बहुत अधिक मार्जिन पास कर रहे हैं ताकि उनके जीवन यापन का खर्च निकल आये। इसी कारण बाजार में अचानक महंगाई बढ़ी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जमाखोरों पर छापेमारी करने के साथ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है ताकि बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहें।
प्रदेश सरकार का यह रुख सही भी है क्योंकि आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह जरूरी है। लेकिन इसके साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि या तो कीमतें कम हों या फिर लोगों की आय बढ़े ताकि लोग जीवन निर्वाह कर सकें। जमाखोरी पर शिकंजा कसना सही कदम है लेकिन सिर्फ इससे स्थिति सामान्य नहीं होगी। सरकार को महंगाई घटाने या आय बढ़ाने की पहल करनी होगी अन्यथा इस महंगाई में सिर्फ सरकारी या बड़े कारपोरेट कर्मचारी ही सर्वाइब कर पायेंगे।





