महामारी के संकट के बीच चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के नतीजों से स्पष्ट हो गया था कि देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है और इसी का परिणाम है कि पहली तिमाही की जीडीपी में एक चौथाई की बड़ी गिरावट सामने आयी थी। लॉकडाउन तिमाही के इस नकारात्मक प्रदर्शन के बाद उम्मीद की जा रही थी कि जब अर्थव्यवस्था खुलेगी तो धीरे-धीरे पटरी पर आ जायेगी।
अनलॉक के बाद रिकवरी देखने को मिल भी रही है और कृषि व औद्योगिक क्षेत्र कोरोना काल के पहले की स्थिति में आने भी लगे हैं। जॉब डेटा, जीएसटी कलेक्शन, निवेश, निर्यात, कृषि, निर्माण, विनिर्माण, ऑटो, इलेक्ट्रिसिटी, फॉरेक्स रिजर्व जैसे प्रमुख क्षेत्र या तो महामारी के पूर्व की स्थिति में पहुंच गये हैं या फिर उस लैंडमार्क तक पहुंचने की कोशिश में हैं।
लॉकडाउन के दौरान देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पस्त हो गयी थी। ऐसे में बेरोजगारी एवं आर्थिक गर्दिश से देश को निकालने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के पैकेज का एलान किया था जो आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित तीसरे पैकेज के बाद बढ़कर 30 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया है। इन पैकेजों का असर भी दिखने लगा है।
अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लॉकडाउन का दूसरा चरण देश में नहीं लौटा तो तीसरी तिमाही में ऋणात्मक विकास से अर्थव्यवस्था निकल सकती है और चौथी तिमाही में मामूली ग्रोथ भी दर्ज कर सकती है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि जैसे विनिर्माण, कृषि एवं बुनियादी क्षेत्र को पैकेज एवं प्रोत्साहन के सहारे फिर से खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है वैसे ही उपाय सर्विस सेक्टर के लिए भी किया जाये।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अभी कल ही टेलीकॉम, ऑटो, फार्मास्युटिकल, बुनियादी ढांचा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन एवं रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी जिसमें दो लाख करोड़ के खर्च का प्रस्ताव किया गया है। अर्थव्यवस्था को सहारा देने के क्रम में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तीसरे पैकेज की घोषणा करते हुए 2.65 लाख करोड़ के व्यय का प्रस्ताव किया है।
इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के साथ ही नये रोजगार पर सरकार सामाजिक सुरक्षा के संविधिक दायित्व के तहत कंपनियों पर आने वाले खर्च को दो साल तक स्वयं वहन करेगी। पीएफ एवं ईपीएस पर कंपनियों द्वारा खर्च किया जाने वाला 12 फीसद कंट्रीब्यूशन सरकार देगी। इसमें रियल इस्टेट, प्रधानमंत्री आवास योजना और उर्वरक सब्सिडी पर भी बड़ी घोषणाएं की गयी हैं। ये छोटे-छोटे पैकेज अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को बड़ा सहारा देंगे और इससे कारोबारी गतिविधियां पटरी पर आने के साथ रोजगार की स्थिति में भी सुधार होगा।
इन पैकेजों के बावजूद अभी भी सर्विस सेक्टर को बड़े राहत का इंतजार है। होटल, हॉपिटैलिटी, शिक्षा, एविएशन, मनोरंजन, रिटेल जैसे तमाम क्षेत्रों को लॉकडाउन में बड़ा नुकासन हुआ है और इनको दुबारा खड़ा करने के लिए जरूरी है कि सरकार इनको वित्त पोषित करने के साथ ब्याज सब्सिडी एवं रोजगार आधारित प्रोत्साहन योजना के जरिये राहत प्रदान करे। सर्विस सेक्टर सबसे बड़ा एवं उर्वरा क्षेत्र है और इसके सुधारे बिना अर्थव्यवस्था का पटरी पर लौटना कठिन है।





