एसएनए के वाल्मीकि रंगशाला में गजल संध्या का आयोजन
लखनऊ। भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् एवं उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षितिज शृंखला के अंतर्गत शुक्रवार को डॉ. प्रभा श्रीवास्तव द्वारा गजलों की प्रस्तुति स्थानीय वाल्मीकि रंगशाला संगीत नाटक अकादमी विपिनखंड, गोमतीनगर में किया गया।
जानीमानी गजल गायिका डा. प्रभा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का आगाज हसरत मोहानी की सुप्रसीद्ध गजल चुपके चुपके रात दिन…से हुआ, जिसे सुनकर पूरा माहौल संगीतमय हो गया। कार्यक्रम के अगले पड़ाव में नासिर काजमी की गजल दिल में एक लहर सी उठी अभी…, तनवीर नकवी की गजल आवाज दे कहाँ है…, ख्वाजा परवेज की गजल प्यार भरे दो शमीर्ले नयन…, कैफी आजमी की मशहूर गजल तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो…,फिराक गोरखपुरी की गजल बहुत पहले से यू कदम की आहट…, शेहेर्यार की गजल जिंदगी जब भी तेरे बज्म में लाती है मुझे…सुनाकर हर किसी का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के आखिरी प्रस्तुति में साहिर लुधियानवी की जानीमानी गजल तुम अपना रंज को गम…को प्रस्तुत कर पूरी शाम को रुमानी बना दिया।
कार्यक्रम में हारमोनियम पर इलियास, तबला पर नितीश भारती, सारंगी पर जीशान अब्बास, सिन्थ्साइजर पर रिंकू राज ने खूबसूरत संगत दी।
डॉ. प्रभा श्रीवास्तव गजल गायन के क्षेत्र में एक चिर परिचित नाम है। आप की गायन शैली में अनुग्रह, अनुभव, विशेषज्ञता, आचरण, और विभिन्न गायन शैली की झलक परिलक्षित होती है तथा आप संगीत के लिए पूरी तरह से समर्पित है। आपने गजल गायन के साथ माथ उप शास्त्रीय संगीत कला को अपने कठिन परिश्रम से जीवंत कर नए आयामों को छूना है और एक सर्वश्रम एवं निपुण कलाकार के रूप म काना जगत में स्थान प्राप्त किया हैं। आप को अपनी संगीत कला के माध्यम में देश के विभित्र पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।





