back to top

जीवन में संघर्ष

जीवन में सफलता हमेशा संघर्षों से ही मिलती है। सफलता का मार्ग बहुत ही जटिल, ऊबड़-खाबड़ होता है। अगर सफलता आसानी से मिल भी जाये तो उससे वह आनन्द नहीं मिलता है जो बड़े-बड़े संघर्षों के बाद मिलता है। इसलिए हर व्यक्ति को संघर्षों से पीछा छुड़ाने के बजाय चुनौतियां स्वीकार करनी चाहिए। इससे व्यक्तित्व निखरता है और उसकी गौरव-गारिमा में श्रीवृद्धि होती है।

ऐसी एक भी सफलता नहीं है जो कठिनाइयों से संघर्ष किए बिना ही प्राप्त हो जाती हो। जीवन के महत्वपूर्ण मार्ग विघ्न-बाधाओं से सदा ही भरे रहते हैं। यदि परमात्मा ने सफलता बिना परिश्रम के दे दिया तो बिलकुल नीरस एवं उपेक्षणीय हो जाती। जो वस्तु जितनी कठिनता से, जितना खर्च करके मिलती है, वह उतनी ही आनन्द दायक होती है।

कोई शाक या फल जिन दिनों सस्ता और काफी संख्या में मिलता है उन दिनों उसकी कोई पूछ नहीं होती, पर जिन दिनों वह दुर्लभ होता है उन दिनों अमीर लोग उसकी खोज करके महंगे दाम पर खरीदते हैं। स्वर्ण की महत्ता इसलिए है कि यह कम मिलता है। यदि कोयले की तरह सोने की खानें निकल पड़ें तो उसे भी लोग वैसी ही लापरवाही से देखेंगे जैसे आज लोहे आदि सस्ती वस्तुओं को देखा जाता है।

दुर्लभता और दुष्प्राप्यता से आनन्द का घनिष्ठ संबंध है। जब प्रेमी और प्रेमिका दूर-दूर रहते हैं तो एक दूसरे को चन्द्र-चकोर की भांति याद किया करते हैं। परन्तु जब सदा ही एक जगह रहना होता है तो दाल में नमक कम पड़ने या सिन्दूर की बिन्दी लाने में भूल हो जाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर कलह होने लगती है। जो वस्तुएं दुर्लभ है, सर्व साधरण को आसानी से नहीं मिलतीं उन्हें पा लेना ही सफलता कहते हैं। जिन कार्यों की सफलता सर्वसुलभ है वैसे कार्य तो सब लोग सदा ही करते रहते हैं।

उनके लिए न कोई पुस्तक पढ़ने की आवश्यकता पड़ती है और न लेखक को लिखने की। यदि महत्वपूर्ण सफलताओं को प्राप्त करने में कुछ बाधा न होती तो वे महत्वपूर्ण न रहतीं और न उनमें कुछ रस आता। कोई रस और कोई विशेषता, न रहने पर यह संसार बड़ा ही नीरस एवं कुरूप हो जाता, लोगों को जीवन काटना एक भार की भांति अप्रिय कार्य प्रतीत होने लगता।

कठिनाइयों के न रहने पर एक और हानि होती है कि मनुष्य की क्रियाशीलता, कुशलता एवं चैतन्यता नष्ट हो जाती। ठोकरें खाकर अनुभव एकत्र किया जाता है। घिसने और पिसने से योग्यता बढ़ती है। कष्ट चोट सहकर मनुष्य दृढ़, बलवान और साहसी बनता है। मुसीबत की अग्नि में तपाये जाने पर बहुत सी कमजोरियां जल जाती हैं और मनुष्य खरे सोने की तरह चमकने लगता है।

RELATED ARTICLES

नींव पूजन से शुरू हुआ 35 फुट ऊंचे मानस्तंभ का निर्माण

लखनऊ। आशियाना दिगंबर जैन मंदिर परिसर में अहंकार को तोड़ने तथा विनय, नम्रता और समर्पण का भाव जागृत करने के प्रतीक 35 फुट ऊंचे...

व्यंग्य नाटक ‘क्रियाकर्म ट्वेंटी फोर सेवन’ का मंचन आठ को

लखनऊ। संस्कृति मंत्रालय और संस्कृति निदेशालय के सहयोग से बिम्ब सांस्कृतिक समिति व्यंग्य नाट्य 'क्रिया कर्म ट्वेंटी फोर सेवन....' का मंचन आठ सितंबर की...

फिर आई याद कबीर की सहित तीन पुस्तकों का विमोचन

डॉ. शम्भुनाथ की प्रथम पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह आयोजित लखनऊ। स्मृतिशेष डॉ. शम्भुनाथ की प्रथम पुण्यतिथि पर पारस बेला न्यास, कबीर शांति मिशन तथा डॉ....

मायावती का महिलाओं से आह्वान…रेवड़ियों और लुभावने वादों से रहें सावधान

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने महिला मतदाताओं से निजी लाभ वाले लुभावने वादे एवं घोषणाओं से बचने की अपील करते...

यह रणनीतिक बदलाव का दौर, समुद्री क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही: एडमिरल स्वामीनाथन

मुंबई। पश्चिम एशिया में संकट के बीच नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने सोमवार को कहा कि यह महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव का दौर है,...

सीएम योगी बोले- श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को जीवन में उतारें

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्र लिखकर प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनसे भगवान श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म तथा...

फिल्म ‘टॉक्सिक’ ने देशभर के सिनेमाघरों में 250 करोड़ से अधिक की कमाई की

नयी दिल्ली। अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ ने देशभर के सिनेमाघरों में 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई...

सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित की

नयी दिल्ली। सरकार ने देश में चिप विनिर्माण के परिवेश को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0...

नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ की त्रासदी ने हिंदूकुश हिमालय की संवेदनशीलता उजागर की : संरा के जलवायु प्रमुख

नयी दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील का कहना है कि नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने और अचानक बाढ़ आने...