सच बात तो यह है कि अभावग्रस्त, कठिनाइयों में पले हुए, साधनहीन व्यक्ति ही संसार के नेता, महात्मा, महापुरुष, सफल जीवन, मुक्तिपथगामी हुए हैं। कारण यह है कि विपरीत परिस्थितियों से टकराने पर मनुष्य की भौतिक अंत: प्रतिभा जाग्रत होती है। सुप्त शक्तियों का विकास होता है।
पत्थर पर रगड़ खाने वाला चाकू तेज होता है और वह अपने काम में अधिक कारगर साबित होता है। उसका स्वभाव, अनुभव और दिमाग मंज कर साफ हो जाता है, जिससे आगे बढ़ने में उसे बहुत सफलता मिलती है। इसके विपरीत जो लोग अमीर और साधन सम्पन्न घरों में पैदा होते हैं उन्हें जीवन की आवश्यक सामग्रियां प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। लाड़, दुलार, ऐश, आराम के कारण उनकी प्रतिभा निखरती नहीं, वरन बंद पानी की तरह सड़ जाती है।
यह निष्क्रिय चाकू की तरह जंग लगकर निकम्मी हो जाती है। आमतौर पर आजकल ऐसा देखा जाता है कि अमीरों के लड़के अपने जीवन में असफल रहते हैं और गरीबों के लड़के आगे चलकर चमक जाते हैं। पुराने जमाने में राजा रईस अपने लड़कों को ऋषियों के आश्रम में इसलिए भेज देते थे कि यहां रहकर अभावग्रस्त जीवन व्यतीत करें और अपनी प्रतिभा को तीव्र बनायें।
हमारा उद्देश्य यह कहने का नहीं है कि अमीरी कोई बुरी चीज नहीं है और अमीरों के घर में पैदा होने वाले उन्नत जीवन नहीं बिता सकते। जहां साधन है वहां तो और भी जल्दी उन्नति होनी चाहिए। बढ़ई के पास बढ़िया लकड़ी और अच्छे औजार हों तब तो वह बहुत ही सुंदर फर्नीचर तैयार करेगा यह तो निश्चित है। हमारा तात्पर्य केवल यह कहने का है कि यदि जिन्दगी जीने की कला आती हो तो अभाव, कठिनाई या विपरीत परिस्थिति भी कुछ बाधा नहीं डाल सकती।
गरीबी या कठिनाई में साधनों की कमी का दोष है तो प्रतिभा को चमकाने का गुण भी है। अमीरी में साधनों की बाहुल्यता है तो लाड़ दुलार और ऐशो आराम के कारण प्रतिभा के कुन्द हो जाने का दोष भी है। दोनों ही गुण दोषयुक्त हैं। किन्तु जो जीवन जीना जानता है, वह चाहे अमीर हो या गरीब, अच्छी परिस्थितियों में अनुकूलता और आनन्द प्राप्त कर सकता है। आनन्दमय जीवन बिताने के लिए धन, विद्या, अच्छा सहयोग, स्वास्थ्य आदि की आवश्यकता है।
परन्तु ऐसा न समझना चाहिए कि इन वस्तुओं के होने से ही जीवन आनन्दमय बन सकता है। एक अच्छी पुस्तक लिखने के लिए कागज, दवात, कलम की आवश्यकता है। परन्तु इन तीनों के इकट्ठे हो जाने से ही पुस्तक तैयार नहीं हो सकती है। बुद्धिमान लेखक ही उत्तम पुस्तक के निर्माण में प्रमुख है।





