शहर की सबसे पुरानी रामलीला का छठवां दिन
डिजिटल लाइट और साउंड से सजी ऐशबाग रामलीला
लखनऊ। शहर की ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला में चल रहे रामोत्सव – 2025 के मंच पर शनिवार को वन मे श्रीराम लखन द्वारा कुटी निर्माण किया जाता है और माता सीता सहर्ष उसमें अपना जीवन यापन आरंभ कर देती हैं । इसी बीच भरत जी गुरु वशिष्ठ, तीनों माताओं संपूर्ण मंत्रिमंडल के साथ ही अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ अयोध्या से वन की ओर प्रस्थान करते हैं जहाँ राह में उनकी भेंट निषादराज से होती है और उन्हे अपने साथ लेकर भरत जी श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के कामदगिरि की ओर प्रस्थान करते हैं जहाँ प्रभु श्रीराम और माता सीता निवास कर रहे होते हैं । दूर से अयोध्या की विशाल सेना देख लक्ष्मण को लगता है भरत राजा बनकर श्रीराम से युद्ध करने आ रहे हैं जिस पर उन्हे क्रोध आ जाता है पर कोमल हृदय रघुनाथ उन्हे समझाते हैं इसी बीच भरत सभी के साथ वहाँ पहुंच जाते हैं जहाँ वन में श्रीराम से सभी की भेट होती है और सभी उन्हे वनवास त्यागने को कहते हैं कैकेई अपना वचन वापस लेने की बात करती हैं परन्तु मयार्दा पुरुषोत्तम अपने दिवंगत पिता को दिए वचन पर कर्त्तव्यपरायणता से अडिग रहते हैं और वनवास पूर्ण कर ही लौटने की बात करते हैं । यह देख भरत श्रीराम की चरण पादुकाएं रख कर 14 वर्ष तक अयोध्या का राजपाठ चलाने की व उनके वापस आने के उपरांत सिंहासन श्रीराम को सौंपने का विचार रखते हैं जिसे सभी सहर्ष स्वीकार लेते हैं इसके उपरांत सभी श्री सीताराम व लक्ष्मण जी से भेंट विदा करते हैं और भरत जी प्रभु की चरण पादुकाएं लेकर अवधपुरी की ओर वापस लौट पड़ते हैं । इस मिलन और विदाई के दौरान प्रेम, त्याग, विरह और वेदना के दृश्यों को कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से मंच पर जीवंत किया । अयोध्या पहुंच कर भरत जी भी महल और राजषी सुखों का परित्याग कर वनवासी का भेष धारण कर नंदीग्राम में कुटी बनाकर श्रीराम की चरण पादुकाएं सिंहासन पर रखते हुए अपनी कुटी से ही आवश्यक राजकीय कार्यों का आरंभ कर देते हैं यही त्याग भरत को महात्मा भरत बना देता है ।सूर्यवंश के कुल की इस दशा का दोषी मानते हुए कैकेई का विलाप देख दर्शक विकल हो उठते हैं । श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया की रविवार को श्री राम का अनुसुइया अत्रि मुनि एवं भारद्वाज मुनि के आश्रम मे पदार्पण, पंचवटी निर्माण, सूर्पनखा का प्रवेश व लक्ष्मणजी द्वारा उसका नसिका विच्छेदन, सूर्पनखा का रावण दरबार में विलाप , रावण मारीच संवाद , स्वर्णमृग लीला, सीता हरण, जटायु राम संवाद , सीता और रावण संवाद की लीलाएं मुख्य होंगी। उन्होंने बताया की संस्कृतिक मंच पर प्रत्येक दिन होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले सभी कलाकारों को समिति द्वारा प्रशस्तिपत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जाता है और यह क्रम निरंतर जारी रहेगा ताकि कलाकारों का उत्साह वर्धन होता रहे । रामलीला के मंचन से पूर्व सांस्कृतिक मंच पर आंचल समाजोत्थान सेवा समिति के कलाकारों ने आरती शुक्ला के निर्देशन में गणेश वंदना (गजवंदन) ‘ जय शिव शंकर , दुर्गा स्तुति , रघुवर झूल रहे अपनी उमंग में (समूह नृत्य)राम राम राम राम (राम भजन) समूह नृत्य कान्हा रे थोड़ा सा प्यार दे डांडिया समूह नृत्य (समूह नृत्य) सरस्वती वंदना समूह नृत्य राम जी की निकली सवारी पर इलाक्षी, राहुल, अजिता, संयुक्ता, सिद्धि, आव्या अंशवी व सुदीक्षा ने समूह नृत्य प्रस्तुत किए । इसके उपरांत नृत्य गुरू सैयद शमशुर रहमान नावेद के निर्देशन में नृत्य समूह द्वारा भगवान श्रीराम पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जिसमे भगवान राम की वंदना “भये प्रगट कृपाला” पर भाव पूर्ण नृत्य किया गया इसके बाद श्रीराम जन्म पर सोहर रूप में नृत्य किया गया समूह की अंतिम प्रस्तुति भगवान श्री सीताराम जी की होली थी । शमशुर रहमान के साथ आकृति भारद्वाज, अश्वनी श्रीवास्तव, अभिलाषा सिंह, अनुष्का श्रीवास्तव, अरुणिमा सिंह, व्रती सक्सेना, दिया चंद्र व आर्ना अग्रवाल ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों का मन मोह लिया।
महानगर रामलीला में हुआ धनुष यज्ञ का मंचन
रघुकुल में सूर्य समान हो तुम हे राम तुम्हारी जय होवे।
हम भक्त हैं और भगवान हो तुम हे राम तुम्हारी जय होवे
लखनऊ। श्री रामलीला समिति महानगर द्वारा लीला मंचन के दूसरे दिन रामलीला का प्रारंभ माता सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर भारती पांडे के निर्देशन में बालिकाओं द्वारा सुंदर सामूहिक नृत्य किया गया। राजा जनक के आमंत्रण पर राम और लक्ष्मण विश्वामित्र मुनि के साथ सीता स्वयंवर में जनकपुरी पहुंचे जहां देश-विदेश के अनेकों राजा आए हुए थे। इस अवसर पर लंका पति रावण का भी आगमन हुआ जिस पर व्यंग्य करते हुए बाणासुर ने कहा कि शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना तुम्हारे बस की बात नहीं है। अनेक राजाओं ने भी प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए अंत में रामचंद्र जी ने गुरु विश्वामित्र जी से आशीर्वाद लेकर प्रत्यंतर चढ़ाने का प्रयास किया तो शिव धनुष टूट गया। सीता जी ने रामचंद्र जी को वरमाला पहना दी । धनुष टूटने की गर्जना को सुनकर परशुराम जी राजा जनक के दरबार में पहुंच गए और उन्होंने क्रोध में आकर कहा कि जनक राजा बता जल्दी यह शिव धनुष किसने तोड़ा है लक्ष्मण जी ने परशुराम जी को चिढाते हुए कहा कि यह पुराना धनुष हमसे छूते ही टूट गया इसमें हमारा क्या दोष है अब आपको जो कुछ करना है कर लें परशुराम लक्ष्मण के इस आकर्षक संवाद के बाद अंत में राम ने परशुराम से कहा क्यों करते हैं क्रोध मुनि जी क्या है दोष हमारा कह कर उनको शांत करने का प्रयास किया अंत में परशुराम जी समझ गए कि यह वास्तव में ईश्वर के स्वरूप है और उन्होंने अपनी त्रुटि हेतु श्री राम से क्षमा याचना की और अनजाने के वाद – विवाद हुआ छमा कीजिएगा। रघुकुल में सूर्य समान हो तुम हे राम तुम्हारी जय होवे।
हम भक्त हैं और भगवान हो तुम हे राम तुम्हारी जय होवे के साथ ही उनका पूजन किया। अयोध्या में रामचंद्र जी की राजगद्दी की घोषणा होती है जिसे रानी के कैकई की दासी मंथरा सुनती है और राजमहल में जाकर रानी कैकई के कान भरती है तो मंथरा ने कुटिल नीति अपनाते हुए कैकई को राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने की सलाह दी उसके बाद दशरथ कैकई संवाद में कैकई ने अपने दोनों वरदान मांगे जिसमें राम को वनवास और अपने पुत्र भरत को राजगद्दी पर बिठाने का प्रस्ताव दशरथ को दिया । किसी के साथ द्वितीय दिवस की रामलीला संपन्न होती है। माता सरस्वती की भूमिका में मिस्टी श्रीवास्तव, राजा जनक की भूमिका में हरीश लोहुमी, सुनैना की भूमिका में भावना लोहुमी, राम की भूमिका में ऐसी लोहुमी, लक्ष्मण की भूमिका में फाल्गुनी लोहुमी, सीता की भूमिका में अनुराधा मिश्रा,गुरु सदानंद की भूमिका में घनानंद जोशी, रावण की भूमिका में भास्कर जोशी, बाणासुर की भूमिका में एन बी जोशी, परशुराम की भूमिका में नवीन पांडे, बंदीजन की भूमिका में पंकज त्रिपाठी एवं संजीव भट्ट, मंत्र की भूमिका में राधिका बोरा कैकई की भूमिका में आशा रावत दशरथ की भूमिका में प्रसिद्ध कलाकार कुणाल पन्त और सुमंत की भूमिका में कमल पंत थे।
श्रीराम जन्म संग 6 दिवसीय रामलीला शुरू
लखनऊ। वशिष्ठ जी की सलाह पर संतान प्राप्ति के लिए राजा दशरथ तीनों रानियों कौशल्या, सुमित्रा, कैकेई के साथ कामेष्टी यज्ञ करते है। यज्ञ पूर्ण होने पर अग्निदेव प्रसन्न होकर राजा दशरथ को प्रसाद का एक पात्र देते है। राजा वह प्रसाद तीनों रानियों में बांट देते है और निश्चित समय के पश्चात् राजा को चार पुत्रों की प्राप्ति होती है, जिनके नाम राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे जाते है। सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना में शनिवार को शुरू हुए 6 दिवसीय रामलीला के 33वें मंचन का आगाज प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेशजी की आरती से हुआ। जिसके पश्चात बेटियों ने श्रीगणेशा वंदना पर समूह नृत्य की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पहले दिन कलाकारों ने श्रीराम जन्म, ताड़का वध, धनुष यज्ञ व परशुराम लक्ष्मण संवाद का बखूबी मंचन किया। इस मौके पर क्षेत्रीय पार्षद मान सिंह यादव, श्रीरामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेश कुमार तिवारी, महामंत्री जितेंद्र मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सत्य नारायण मौर्या, संयुक्त मंत्री शांति स्वरूप शुक्ला, निर्देशक उमाशंकर राठौर, पुजारी पं. वीरेंद्र पाठक सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।





