भारत में दो ऐसी शख्सियतें हैं जिनका लोग बहुत सम्मान करते हैं। इनमें से एक हैं महात्मा गांधी और दूसरी हैं मदर टेरेसा। इन दोनों का ही प्रार्थना में अटूट भरोसा रहा है। महात्मा गांधी की ऐसी कोई शाम नहीं होती थी, जब वह संध्या प्रार्थना न करते हों और ऐसी कोई सुबह नहीं होती थी, जब वह सामूहिक प्रार्थना न करते रहे हों। जहां तक मदर टेरेसा का सवाल था, तो वह तो हर कमजोर, पीड़ित, गरीब, बीमार और असहाय व्यक्ति के लिए दिनभर प्रार्थना करती थीं।
इस कोरोना काल ने न सिर्फ प्रार्थनाओं के आध्यात्मिक महत्व को बल्कि उनकी भावनात्मक ताकत और ऊर्जा को नये सिरे से स्थापित किया है। एक बार को स्थिति यहां तक आ गई कि अमरीका के जिन राज्यों में लॉकडाउन था, प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने उन राज्यों को तुरंत चर्च और दूसरे धार्मिक स्थलों को खोलने का सुझाव दिया था, ताकि लोग वहां जाकर प्रार्थना कर सकें।
हालांकि कोरोना काल में बहुत से देशों ने ज्यादातर धर्मिकस्थलों को बंद रखा। भारत में भी लंबे समय तक धार्मिकस्थल बंद रहे, लेकिन इस दौरान शायद लोगों ने सबसे ज्यादा प्रार्थनाएं की हैं, अपनी सुरक्षा के लिए, अपनों की सुरक्षा के लिए, दुनिया की सुरक्षा के लिए और भविष्य की सुरक्षा के लिए। इससे पता चलता है कि तमाम मेडिकल उन्नति, तमाम आर्थिक उन्नति के बावजूद आज भी प्रार्थनाओं के संबल का कोई विकल्प नहीं है। ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना..।
प्रार्थना की ऐसी पंक्तियां महज मन बहलाने का जरिया नहीं होतीं, न ही ये अपने आप को झांसा देने की बेवकूफी हैं। प्रार्थना में सचमुच प्रभाव होता है। प्रार्थनाएं सचमुच कारगर होती हैं। इसे वैज्ञानिकों ने प्रयोगों से सिद्घ किया है। यह महज संयोग नहीं है कि जब डॉक्टरों का किसी मरीज पर अपना कोई वश नहीं चलता तो वह मरीज के लिए प्रार्थना करते हैं।
कई साल पहले न्यूयार्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने इस सम्बंध में बाकायदा वैज्ञानिक प्रयोग किए हैं और इन प्रयोगों के जरिए यह सिद्ध किया है कि प्रार्थनाओं का असर न सिर्फ होता है बल्कि कई बार प्रार्थनाएं उन क्षणों में कारगर होती हैं, जब कोई दूसरा उपाय कारगर नहीं होता। प्रार्थनाओं के इस प्रभाव को जानने के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने डा. रोजेरियो ए लोबो के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के एक अस्पताल में मानव निषेचन (फर्टिलाइजेशन) पर एक अध्ययन प्रयोग किया।





