उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में हुआ आयोजन
लखनऊ। लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक की 107वीं जयन्ती के अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित और ललित सिंह पोखरिया को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ कवि उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता एवं मुख्य अतिथि आत्म प्रकाश मिश्र ने डा. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक साहित्य सम्मान-2025 से वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित और विद्या मिश्र लोक संस्कृति सम्मान-2025 से ललित सिंह पोखरिया को सम्मानित किया। पुरस्कार स्वरूप ग्यारह-ग्यारह हजार रुपये की धनराशि, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न व प्रशस्ति-पत्र भेंट किया गया। सम्मानित रचनाकार प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि निशंक जी की स्मृति में मनभाव-विभोर हो जाता है। वे मेरे गुरु तो नहीं थे किन्तु गुरु जैसे ही थे। मुझे उनसे सदैव प्रेरणा मिलती रही। सुकवि विनोद को अजर-अमर बनाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। निशंक जी जीते-जागते इतिहास थे। उन्होंने कहा कि निशंक जी ब्रजभाषा अवधी और हिन्दी सवैया के सिद्धहस्त कवि थे। ललित सिंह पोखरिया ने कहा कि मेरी लोकमंच की यात्रा 1986 से शुरू हुई। मैं अविभाजित उत्तर प्रदेश का पुत्र हूं। मैंने भी अनेक बड़े-बड़े लोक रंग कर्मियों की तरह लोक गीता के मंचन का कार्य किया। लोक कलाओं के प्रति अनुसूचित जनजातियों के समाज में गौरव गान जगाने का कार्य किया। मैं ग्लैमर की दुनिया में न जाकर लोक संस्कृति को चुना। मुख्य अतिथि आत्म प्रकाश मिश्र ने कहा कि आठ दशक तक निशंक जी ने साहित्य साधना की ऐसे विरले ही लोग होते हैं। अध्यक्षता कर रहे उदय प्रताप सिंह ने कहा कि निशंक जी ऐसी मशाल थे जो पहाड़ की ऊंचाई पर बैठे थे और लोगों को दिशा दिखाते थे। इस अवसर पर पंडित चन्द्र भूषण त्रिवेदी रमई काका को स्मरण करते हुए उनकी रचनाओं का पाठ आलिन्द त्रिवेदी ने किया। संचालन डा. योगेश ने किया।





