नदवा कॉलेज में जनाजा की नवाज अदा की गई
लखनऊ। शायर मुनव्वर राना (71) को सोमवार को ऐशबाग के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दिल का दौरा पड़ने की वजह से रविवार देर रात उनका निधन हो गया था। उनके जनाजे में शामिल होने के लिए लेखक जावेद अख्तर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने जनाजा को कंधा दिया। नदवा कॉलेज में जनाजा की नवाज अदा की गई। जिसमें सैफ बाबर, हसन इब्राहिम, तारीख कमर जैसे शायर शामिल हुए। उनके निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई अन्य हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। मुनव्वर राना को किडनी और हृदय रोग से संबंधित समस्याएं थीं। उनकी बेटी सुमैया राना ने बताया कि रात साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनके परिवार में पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा है। राना के बेटे तबरेज ने बताया कि बीमारी के कारण वह 14 से 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता और फिर एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने रविवार रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली।
उनकी कमी हमेशा खलेगी-जावेद
शायर मुनव्वर राना की आखिरी यात्रा में कई लोगों ने शिरकत की। प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख़्तर भी इस दौरान वहां पहुंचे। उन्होंने मुनव्वर राना के जनाजे को कंधा भी दिया। जावेद अख़्तर ने मुनव्वर राना के निधन को शायरी और उर्दू का बड़ा नुकसान बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, ह्यशायरी और उर्दू का यह एक बड़ा नुकसान है। मुझे इसका बेहद अफसोस है। यह नस्ल एक-एक करके जा रही है और इसकी भरपाई नहीं हो पाएगी, उनकी कमी हमेशा खलेगी। उनकी शायरी प्रेरक है, उनके लिखने का अपना अंदाज था। अच्छी शायरी करना मुश्किल है लेकिन उससे भी ज्यादा मुश्किल है अपनी शायरी करना।





