तीन वर्ष से नहीं हुआ उर्दू अकादमी के पुरस्कारों का ऐलान
साल 2022-23 से नहीं बांटे जा सके पुरस्कार, डेढ़ साल से चेयरमैन न कार्यकारिणी
लखनऊ। उर्दू साहित्य की सेवा करने वाले साहित्यकारों को उर्दू अकादमी के पुरस्कार नहीं मिल रहे हैं। पिछले दो वर्ष से पुरस्कार नहीं दिए गए और मार्च 2025 में तीसरा वर्ष भी इसमें जुड़ जाएगा। वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के पुरस्कारों की घोषणा का इंतजार उर्दू साहित्यकारों को है जो कि अकादमी की कार्यकारिणी नहीं होने की वजह रुका हुआ है।
डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अकादमी चेयरमैन का चयन नहीं होने के साथ कार्यकारिणी का गठन भी नही किया जा सका है। यही कारण है कि तीन वर्षों से उर्दू साहित्यकारों के पुरस्कार के लिए आवेदन ठण्डे बस्ते में पड़े हैं और पुरस्कार का एलान नहीं हो पा रहा है। अकादमी की पुरस्कार समिति अपना काम कर चुकी है लेकिन पुरस्कार घोषित होने के लिए कार्यकारिणी की मंजूरी जरूरी होती है बिना कार्यकारिणी की बैठक के पुरस्कारों की घोषणा नहीं की जा सकती है। इसी कारण उर्दू अकादमी पुरस्कारों का एलान नहीं हो पा रहा है। उर्दू साहित्य में योगदान करने वाले उर्दू साहित्यकारों को पुरस्कार देने की योजना है। जिसमें प्रत्येक वर्ष 150 पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। प्रत्येक वर्ष 50 लाख रुपए के पुरस्कार अकादमी की ओर से दिए जाने की योजना है। जिसमें बड़ा पुरस्कार मौलाना अबुल कलाम सम्मान दिया जाता है। चयनित उर्दू साहित्यकार को पुरस्कार स्वरूप पांच लाख रुपए की धनराशि दी जाती है। इसके अलावा अन्य पुरस्कार दिए जाते हैं।
पहली बैठक में पुरस्कार का प्रस्ताव
उर्दू अकादमी सचिव शौकत अली ने कहा कि मार्च 2025 में तीन साल के पुरस्कार लम्बित हो जाएंगे। पहले भी कार्यकारिणी नहीं होने की वजह से पुरस्कार लम्बित हुए हैं। तीनों वर्षों के आवेदन हो चुके हैं। शासन की ओर से कार्यकारिणी गठित होते ही पहली बैठक में पुरस्कार घोषणा का प्रस्ताव रखा जाएगा।





