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कुंभकर्ण वध और मेघनाद युद्ध लीला ने मंत्रमुग्ध किया

लखनऊ। शुक्रवार को श्री राम लीला समिति ऐशबाग के प्रांगण में स्थित तुलसी मंच पर कार्यक्रम का शुभारम्भ देवताओ की स्तुति के साथ हुआ जिसके बाद सांयकाल 7:30 बजे प्रथम मंच पर स्वर्ण हंस के कलाकारों द्वारा भगवान कृष्ण की वंदना एवं भगवान राम की वंदना भजनो पर नृत्य प्रस्तुत किया ’शुभद्रा नृत्य संस्थान के कलाकारों द्वारा सांयकाल 8 बजे अनेक भजनो पर नृत्य प्रस्तुत हुआ जिसका समापन सांयकाल 8:30 बजे हुआ ’ श्री रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने हुमा साहू को स्मृति चिन्ह ,रामायण एवं रामनामी दुपट्टा देकर सम्मानित किया एवं नृत्य करने वाले बच्चो को प्रमाण पत्र स्मृति चिन्ह देकर उनका उत्साह वर्धन किया तत्पश्चात सांयकाल 8:30 बजे से रामलीला मंचन पूरे राममय वातावरण में भास्कर बोस जी के निर्देशन में प्रारम्भ हुआ, जिसमे रामा दल में हनुमान का चूड़ामणि देना, दरबार से विभीषण का निष्कासन, राम विभीषण मिलन, विभीषण राज्याभिषेक, समुद्र पूजा, सेतुबंध स्थापना, रावण अंगद संवाद, युद्ध घोषण, दुरमुख वध, कुम्भकरण रावण संवाद कुम्भकरण वध, नाग फांस, लक्ष्मण शक्ति, संजीवनी लाना के साथ रामलीला का मंचन रात्रि 11:30 बजे संपन्न हुआ।

…और धूं-धूं कर जल उठी सोने की लंका
लखनऊ। बिन पूृंछे पूंछ घुमा कपि ने उद्यान उजाड़ा सारा, अतएव निपूंछा करो इसे अब यह आदेश हमारा है। रावण का आदेश मिलते ही हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी जाती है तो हनुमान जी कहते है कि हे दुष्ट रावण अब यही पूंछ तेरा अभिमान चूर कर देगी। हनुमान अपनी पूंछ से पूरी लंका में आग लगा देते है और पूरी लंका धूं-धूं कर जल उठती है। सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कालोनी में चल रहे रामलीला के 32वें मंचन के चौथे दिन का शुभारंभ शुक्रवार को मां दुर्गा जी की आरती से हुआ।

लो यह मेरी चूड़ामणि लो, उनके चरणों में रख देना…अपनी पूंछ की आग बुझाकर हनुमान जी माता सीता के सम्मुख आते है तो माता सीता उन्हें चूड़ामणि देती है जिसके पश्चात् माता सीता से आज्ञा लेकर हनुमान जी सागर पार कर वानरों के पास आ जाते है। कलाकारों ने बालि वध, माता सीता की खोज, लंका दहन, विभीषण शरणागति, राजकुमार वध व अंगद-रावण संवाद का मंचन किया। लंका दहन का दृश्य देख दर्शकों ने हनुमान और अंगद-रावण संवाद का आनंद लेते हुए अंगद के चरित्र की भूरि-भूरि प्रशंसा की। समिति के अध्यक्ष सुरेश तिवारी व महामंत्री जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि शनिवार को रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक व पारितोषिक वितरण के साथ पांच दिवसीय रामलीला का समापन होगा।

रावण के अहंकार ने जलवा दी सोने की लंका
लखनऊ। श्री रामलीला समिति महानगर की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में शुक्रवार को भगवान शंकर की आरती के साथ लीला की शुरूआत हुई।
लीला में दिखाया कि हनुमान जी लंका में प्रवेश करते है माता जानकी से मिलने के बाद रावण की अशोक वाटिका को उजाड़ कर तहस-नहस कर देते हैं। रावण का पुत्र मेघनाथ उन्हें नागफास में बांध कर अपने पिता के सम्मुख ले जाता है जहां रावण हनुमान जी की पूंछ में कपड़े लपेटकर तेल में डुबोकर आग लगाने का आदेश देता है। उसके बाद हनुमान जी सोने की लंका को आग लगा देते हैं। प्रभु श्रीराम सेतुबंध रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना करते हैं। यह खबर जब रावण को मिलती है तो वह अपने भाई विभीषण से सलाह लेता है कि क्या किया जाए विभीषण की रावण से कहते हैं की रामचंद्र जी से बैर न लें और सीता जी को लौटा दे, विभीषण की बात रावण को नगवार लगती है और वह विभीषण को लात मार कर लंका से निकाल देता है। बाद में अंगद रावण संवाद की लीला चली। रावण अंगद से कहता है। मैं बांध चुका तूफानों को, झंझाओं को, कैद कर चुका सागर के विपुल प्रवाहों को। तेरा स्वामी तो पिद्दी सा है मैं आफत पर काल हूं” तब अंगद समझाते हुए कहते हैं। मेरा मेरा जो कहता है कुछ साथ ना जाएगा तू मुट्ठी बांधे आया था और हाथ पसारे जाएगा। लेकिन रावण की समझ में कुछ नहीं आता है। राम की भूमिका में यशी लोहुमी, लक्ष्मणं फाल्गुनी लोहुमी, सीता अनुराधा मिश्रा, हनुमान महेंद्र पंत, रावण भास्कर जोशी ने किया। मंच संचालन पंडित नारायण पाठक ने किया। समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने बताया कि विजयदशमी शनिवार को शाम 7:00 बजे से रामलीला मंचन के साथ-साथ होगा। मेघनाद और रावण के पुतलों का दहन होगा। इस वर्ष रावण का पुतला 35 फुट और मेघनाथ का पुतला 30 फुट का है। पुतला दहन के बाद आतिशबाजी होगी।

मौसमगंज रामलीला में नारातंक वध और अहिरावण वध का मंचन

लखनऊ। डालीगंज की श्री मौसमगंज रामलीला में शुक्रवार को निर्देशक शिवकुमार वर्मा उप निदेशक राजेश त्रिपाठी व लीला संचालक पीयूष कुमार निगम द्वारा नारांतक वध और अहिरावण वध की लीला का मंचन किया गया। बाद में समिति के अध्यक्ष घनश्याम अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारी ने रामलीला के पत्रों राम लक्ष्मण सीता हनुमान जी की आरती उतारी।

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