एसएनए में नाटक का मंचन
लखनऊ। साहित्यक सांस्कृतिक संस्था की प्रस्तुति नाटक ‘किस्सा गंगा-जमुनी मोहल्ले का’ का मंचन एसएनए के संत गाडगे प्रेक्षागृह में किया गया। नाटक का लेखन रत्ना कौल और निर्देशन चित्रा मोहन ने किया है। साहित्यकार रत्ना कौल जी की दो कहानियां, जादू की छड़ी और गंगा जमुनी इस नाट्यालेख का आधार है।
सन साठ के आसपास का दौर, जब लखनऊ आज से कुछ अलग सा था. उस समय मोहल्लों में आबाद रिश्ते, उनके बीच पनपते इंसानी जज्बात, चुहलबाजियां, अदब, तहजीब और एक दूसरे का ख्याल रखना आम बात थी। ऐसे में मोहल्ले की माहजबी खाला जो छेड़ छाड़ की भाषा में बुड्डन खाला कहलाती हर मुहल्ले की कहानियां जानती भी, बांटती भी, उलझे रिश्तों को सुलझाती अपने अकेलेपन का सहारा भी उन्ही के बीच तलाशती रहती ।
इसी दौर में एक कहानी नवाजुद्दीन साहब के घर की आती है जहां सुरैया आपा की छोटी बहन अर्शी के तेजतर्रार मिजाज को किस तरह बदलते हुए, उसे बड़ों का अदब करना और आपसी रिश्तों को प्यार से संजोना सिखाया जाता है, वहीं दूसरी ओर एक कहानी राधेश्याम पांडे सदफ के घर की है। जहां उनकी सगी चचेरी बहन, जिसे उन्होंने और उनकी पत्नी यशोदा ने बेटी की तरह पाला पोसा है वो दूसरी जात के लड़के से प्रेम कर बैठती है। जात बिरादरी और प्रेम के संघर्ष में नैतिक मूल्यों, बड़ों की इजाजत और पूरे मोहल्ले का एकमत हो कर इस समस्या का निदान ही इस कहानी की खूबसूरती है जो आज के भागते दौर में हमसे कहीं छूटती जा रही।
नाटक में अहम भूमिका संध्या रस्तोगी, नूर अहमद, चित्रा मोहन, रश्मि श्रीवास्तव, विजय सिंह, पीयूष, प्रियंका रंजन, सुमित श्रीवास्तव, मयूख रंजन ने निभायी है।





