अगले साल 58 दिनों तक बजेगी शहनाई
लखनऊ। शादी-विवाह व अन्य शुभ कार्य के लिए शुभ मुहूर्त 15 दिसंबर तक ही है। इसके बाद एक माह तक शुभ कार्य नहीं होंगे। खरमास 16 दिसंबर 2023 से शुरू होकर 15 जनवरी 2024 तक रहेगा। पंडित बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार खरमास में विवाह, जनेऊ संस्कार, नामकरण संस्कार, मुंडन, गृह प्रेवश, भूमि पूजन जैसे शुभ काम करने की मनाही है। खरमास 16 दिसंबर दोपहर 12 बजे से शुरू हो रहा है। इस दिन सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरूआत हो जाएगी। इसे धनु संक्रांति भी कहा जाता है। खरमास का समापन 15 जनवरी 2024 को होगा। सूर्य जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन खरमास खत्म होता है। खरमास की अवधि एक माह की होगी, क्योंकि सूर्य हर राशि में एक महीने तक रहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में विराजमान होते हैं उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास की शुरूआत होती है।
अगले साल 58 दिनों तक बजेगी शहनाई

अगले साल 58 दिनों तक शहनाई बजेगी। इस साल 15 दिसंबर तक शादी होंगी। इसके बाद अगले साल 2024 में सात माह में 58 दिनों तक शादियां होंगी। मिथिला व बनारस पंचांग के अनुसार जनवरी में 9 दिन, फरवरी में 11 दिन, मार्च में 10 दिन, अप्रैल में पांच दिन, जुलाई में छह दिन, नवंबर में 11 दिन तो दिसंबर में छह दिन विवाह के लिए शुभ-मुहूर्त है।
2024 में इन तिथियों में होंगी शादियां
जनवरी – 16, 17, 20, 21, 22, 27, 28, 30, 31
फरवरी- 4, 6, 7, 8, 12, 13, 17, 24, 25, 26, 29
मार्च – 1, 2, 3, 4,5, 6, 7, 10, 11, 12
अप्रैल- 18, 19, 20, 21, 22
जुलाई- 9, 11, 13, 14, 12, 15
नवंबर – 12, 13, 16, 17, 18, 22, 23, 25, 26, 28, 29
दिसंबर- 4, 5, 9, 10, 14, 15
खरमास का मुहूर्त
16 दिसंबर 2023 की शाम 3 बजकर 58 मिनट पर सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद से खरमास शुरू हो जाएगा और एक माह तक के लिए सभी तरह के मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।
खरमास में क्यों नहीं किए जाते हैं मांगलिक कार्य?
ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि सूर्य जब गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो वह अपने गुरु की सेवा में लग जाते हैं। इस दौरान उनका प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
खरमास में न करें ये काम
खरमास के दौरा मांगलिक कार्यों की मनाही होती है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें। इस दौरान बेटी या बहू की विदाई नहीं करनी चाहिए।
खरमास के दौरान के दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों के अलावा खरमास में नया वाहन, घर, प्लाट, रत्न-आभूषण और वस्त्र आदि नहीं खरीदना चाहिए। इस दौरान गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही खरमास की अवधि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।
भगवान विष्णु की करनी चाहिए पूजा
खरमास के दौरान सत्यनारायण भगवान की कथा सुननी चाहिए या फिर पढ़नी चाहिए। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। खरमास के दौरान मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु बृहस्पति की स्थिति खराब है। वह लोग खरमास के दौरान पूजा-पाठ करें। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही गुरुवार को पीली वस्तु का दान करें। रोजाना सूर्य को अर्घ्य देना लाभकारी है। एक तांबे के लोटे में जल, अक्षत, लाल फूल और सिंदूर डालकर अर्घ्य दें। ऐसा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। खरमास के दौरान दान देने का विशेष महत्व है। इसलिए इस दौरान वस्त्र, अनाज, गर्म कपड़े आदि का दान अवश्य दें। खरमास के दौरान भगवान विष्णु को केले, मौसमी फल, सुपारी, पंचामृत, तुलसी आदि अवश्य चढ़ाएं।





