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गणेश उत्सव : बप्पा के स्वागत के लिए इको फ्रेंडली मूर्तियों की मांग ज्यादा

गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है
लखनऊ। गणेशोत्सव को लेकर राजधानी लखनऊ में बप्पा की मनमोहक मूर्तियों से बाजार पूरी तरह से सजने लगे हैं। जगह-जगह छोटी-बड़ी दुकानें लगाई गयी हैं, जहां तरह-तरह के गणेश जी की मूर्तियां बिकने के लिए आयी हैं। शहर में कई जगह अस्थाई दुकानें सज गई हैं।
गणपति बप्पा की मूर्ति के लिए मूर्ति विक्रेताओं एवं निमार्ताओं को आर्डर भी मिल रहे हैं। इस बार गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसको लेकर बाजारों में भी अभी से खरीदारी के लिए खासी भीड़ उमड़ रही है। मूर्तिकार और कारीगर गणेश प्रतिमा को बनाने के काम में जुट गए हैं। छोटी मूर्तियों की सजावट का काम भी जोर शोर से चल रहा है। इस बार महंगाई का असर भगवान गणेश की मूर्तियों पर भी देखने को मिलेगा। मूर्तिकारों ने बताया कि लगभग 20 से 25 फीसदी तक मूर्तियां महंगी हो जाएगी। मूर्तिकार अलग अलग डिजाइन और पैटर्न में गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। बाजार में 8 इंच से लेकर 14 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं बाजार में देखने को मिलेंगी।

गणपति पूजा पर दिखेगा महंगाई का असर:
इस बार गणपति पूजा पर महंगाई का असर दिखेगा। मूर्ति बना रहे कारीगर अमरीश ने कहा है कि हर साल की तरह इस साल भी भगवान गणेश जी की मूर्ति को बनाने का काम 2 महीने पहले शुरू किया गया था। गणेश की छोटी मूर्तियों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। अब बड़ी मूर्तियों के सजावट का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस साल मूर्तियों को बनाने में लगने वाले कच्चे सामान जैसे मिट्टी, लकड़ी, बांस, और पैरा के दाम बढ़ने के कारण मूर्ति के भी दाम में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, साथ ही इस बार कोरोना का असर कम होने के कारण बाजार में लगभग 14 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी। दुकानदार राजू ने बताया कि इस बार मूर्तियों की कीमत लगभग 15.20 प्रतिशत बढ़ गयी है, जिसकी सीधी वजह है अखबार का महंगा होना। जो अखबार पिछले साल तक 10 रुपये किलो मिलता था, इस बार वही अखबार की कीमत 30 रुपये किलो तक पहुँच गयी है। बड़ी मूर्तियों को बनाने के लिए काफी अखबार की जरूरत पड़ती है। इसलिए जो मूर्ति पिछले साल तक 2000 की मिलती थी वो अब 2500 तक की हो गयी है।

शुभ हैं ये अवतार:
इन्द्रेश ने बताया कि वह मूर्तिकार हैं, हमेशा से ही मूर्तियां तैयार कर रहे हैं, लेकिन लखनऊ के लोगों की ओर से इस तरह का खास आदेश पहली बार आया है जब लोगों ने कहा कि उन्हें गजानन की मूर्ति डमरू, शिवलिंग, मोर और सिंहासन के साथ ही गाय के साथ चाहिए। इसी के साथ ही उनका मूषक भी लोगों को चाहिए था इसीलिए लोगों के आदेश के अनुसार मूर्तियां तैयार कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि गणेश भगवान को गाय, डमरू और मोर के साथ ही सिंहासन या शिवलिंग के साथ रखना घर में शुभ माना जाता है।

जगन्नाथपुरी मंदिर में इस बार विराजेंगे पेपर मिल के बप्पा:
पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज में आयोजित गणेश उत्सव में इस बार भक्तों को जगन्ननाथपुरी मंडप के भव्य दर्शन होंगे। इसी जगन्नाथपुरी मंदिर के आकार में सजे भव्य पंडाल में पेपर मिल के बप्पा भक्तों को दर्शन देंगे। यहां गणेश उत्सव 14 सितंबर से होगा। यह जानकारी अक्षय समिति के महासचिव ने दी। उन्होंने बताया कि बीते 14 वर्षों से पेपर मिल कॉलोनी में अक्षय समिति द्वारा भव्य गणेश चतुर्थी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसे पेपर मिल के बप्पा के नाम से जाना जाता है। गणेश उत्सव के दौरान हर रोज शाम को सामूहिक आरती होगी। इसमें सभी भक्त जनों को आरती का मौका मिलता है। फिर गंगा आरती होती है। इसके बाद प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। भजन संध्या, नृत्य और नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
अक्षरधाम पंडाल में विराजेंगे गणपति
लखनऊ। गोमती तट स्थित झूलेलाल घाट पर आयोजित होने वाली शहर के सबसे बड़ी गणेश पूजा में इस बार गणपति बप्पा अक्षरधाम मंदिर की थीम पर सजे पंडाल में विराजेंगे। पूरा पंडाल वाटरप्रूफ और वातानुकूलित बनाया जाएगा। गणेश उत्सव 14 सितंबर से 24 सितम्बर तक मनाया जाएगा। गणेश उत्सव को लेकर पंडाल निर्माण की तैयारी जोरों पर है। कमेटी के संरक्षक भारत भूषण गुप्ता व अध्यक्ष घनश्याम अग्रवाल ने बताया कि इस बार पंडाल अक्षरधाम मन्दिर की थीम पर तैयार हो रहा है। पंडाल 100 फुट चौड़ा और 150 फीट लंबा बनाया जाएगा। वहीं इसकी ऊंचाई करीब 75 से 80 फिट रहेगी। पंडाल बनाने के लिए कोलकाता के करीब 21 कारीगर लगे हैं। संरक्षक भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि महोत्सव में इस बार बच्चों के लिए नए-नए झूले आ रहे हैं। फास्ट फूड, आइसक्रीम, चाट व महिलाओं के श्रृंगार संबंधी सामग्री के स्टॉल लगाए जाएंगे।

मोर, डमरू और सिंहासन पर सवार होंगे गजानन :
शहर के सबसे पुराने लकड़मंडी बाजार में कई सालों से गणपति बप्पा गौरी पुत्र गणेश जी की मूर्तियां तैयार कर रहे राजकुमार ने बताया कि जिस तरह से गणेश भगवान के नाम हैं जैसे सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन उसी के अनुसार मूर्तियां तैयार की जाती हैं। इस साल लोगों ने उन्हें खास आदेश दिया था कि गजानन की मूर्तियां मोर, डमरू, सिंहासन, गाय और शिवलिंग के साथ ही होनी चाहिए इसीलिए इस बार ज्यादातर मूर्तियों को यही रूप देकर तैयार किया गया है। छोटी मूर्तियों की कीमत जहां 1000 रूपए से लेकर 3000 रूपए तक है तो वहीं बड़ी मूर्तियां कीमत 7000 रूपए से लेकर 20,000 रूपए तक है।

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