लखनऊ। आशियाना जैन मंदिर में चल रहे वषार्योग के अंतर्गत पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज ने आज प्रवचन में दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण करना पुण्य का कार्य है, लेकिन इसके साथ किसी जरूरतमंद और गरीब व्यक्ति की सहायता करना भी हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि दान देने की शुरूआत अपने परिवार और रिश्तेदारों से करनी चाहिए। यदि परिवार या रिश्तेदारी में कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर है तो सबसे पहले उसकी मदद करें। इसके बाद समाज में ऐसे परिवारों की सहायता करें, जिन्हें इलाज, बच्चों की पढ़ाई अथवा रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। इन सबके बाद भी यदि किसी की मदद करने की इच्छा हो तो किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता अवश्य करें। उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह नियम बना लेना चाहिए कि वह अपनी आवश्यकताओं पर संयम रखे और गलत चीजों में धन खर्च करने के बजाय प्रतिदिन किसी जरूरतमंद की सहायता करे। उन्होंने कहा, जिस दिन तुमने किसी गरीब की मदद करने का व्रत धारण कर लिया, उस दिन तुम्हारे अंदर भगवान का वास हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां संयम, दया, तप, त्याग और ईमान रहता है, वहीं तीनों लोक के भगवान का वास होता है। उन्होंने लोगों को दूसरों के प्रति दया और संवेदना रखने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य के भीतर मानवता और करुणा का भाव होना ही सच्ची धार्मिकता है। इस अवसर पर समाज के प्रमुख लोगों में आदीश जैन, राजेश जैन, संजीव जैन, अजय जैन, चंद्र प्रकाश जैन, बृजेश जैन, बंटी जैन, संजीव जैन, नलिन राज काशलीवाल, अखिलेश जैनसहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि 30 अगस्त को जिस मानस्तंभ का भूमि पूजन और शिलान्यास किया गया था, उसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण कार्य को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह और प्रसन्नता का माहौल है।





