चर्चा व सम्मान समारोह के साथ लिटरेचर फेस्टिवल सम्पन्न
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम लिटरेचर फेस्टिवल के द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रोफेसर अल्का पाण्डेय के स्वागत शब्दों द्वारा किया गया। प्रथम सत्र का प्रारम्भ प्रोफेसर अल्का पाण्डेय और समकालीन लेखक श्रीमान अलंकार रस्तोगी के मध्य वातार्लाप से हुआ। आपके वातार्लाप का केन्द्र बिन्दु व्यंग्य विधा के लेखन की प्रक्रिया, सार्थकता और वर्तमान युवा पीढ़ी का व्यंग्य विधा से बढ़ते अलगाव के प्रमुख कारणों पर चर्चा रही। तत्पश्चात विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मैत्रेय प्रियदर्शनी द्वारा प्रोफेसर अल्का पाण्डेय तथा श्रीमान अलंकार रस्तोगी जी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इसी क्रम मे प्रोफेसर फातिमा रिजवी द्वारा समकालीन लेखिका और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में सलाहकार संपादक के पद पर कार्यरत माननीय सत्या सरन जी का स्वागत किया गया।
सरन द्वारा महिलाओं का समाज में उत्कर्ष और खुद एक महिला के तौर पर महिलाओं के जीवन में आने वाली चुनौतियों का अवलोकन करते हुए खुद को सशक्त करने का संदेश भी दिया। तत्पश्चात विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मैत्रेयी प्रियदर्शनी जी द्वारा सत्या सरन तथा प्रोफेसर फातिमा रिजवी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। द्वितीय सत्र के दौरान मशहूर लेखिका पद्मश्री श्रीमति विद्या बिन्दु सिंह, प्रो अब्बास रजा नय्यर, श्री ए.पी पाण्डेय, पंकज प्रसून, प्रोफेसर रानू उनियाल आदि महान साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति से मालवीय सभागर की शोभा में चार चांद लग गए।
पैनलिस्ट का परिचय और स्वागत प्रोफेसर रानू उनियाल ने किया। उन्होंनें पद्मश्री विद्या विंदू सिंह की बातचीत कर सत्र की शुरूआत की। सुश्री विन्दु सिंह ने अपने अनुभव को व्यक्त किया जब उन्होंने कविता लिखना शुरू किया। वह हिंदी में अपने लेखन के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने अवधी में कई गीतो कि रचना की। सुश्री विंदू सिंह ने अपनी कविता और हाइकु से लोगों के दिल को छू लिया। प्रोफेसर ए पी पांडे ने अंग्रेजी में लिखे सॉनेट से अपने विचार व्यक्त किए, आपके सॉनेट्स शेक्सपियरियन मॉडल से प्रेरित हैं। उन्होंने सॉनेट के इटालियन मॉडल में भी लेखन किया है।
पंकज प्रसून, एक विख्यात व्यंग्यकार ने एक छात्र के रूप में अपने लखनऊ विश्वविद्यालय के बीते दिनों को याद किया। हास्य की दृष्टि से लखनऊ शहर के कुछ स्थानों के बारे में भी पढा। वह कविताओं में हास्य रचते हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में फन लाइनर कॉलम के लिए जाना जाता है। उन्होंने एक महिला के संघर्ष को अपनी कविता ‘लड़कियाँ बड़ी लड़ाका होती हैं’ के माध्यम से बताया। प्रो. अब्बास रजा नैय्यर ने शहर के महत्व को रेखांकित किया । उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से लखनऊ की मिट्टी में जन्मे महान साहित्यकारों को याद किया। उन्होंने गजलें पढ़ीं. और शहर के इतिहास और संस्कृति का वर्णन किया। अंत मे डा विनीत मैक्सवेल डेविड ने लखनऊ शहर पर अविस्मरणीय कविता का पाठ किया । प्रोफेसर फातिमा रिजवी ने समस्त विभूतियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
जायका ऐ लखनऊ
तृतीय सत्र में जायका ऐ लखनऊ का प्रारम्भ प्रोफेसर राकेश चंद्रा के द्वारा किया गया। इस सत्र में डॉ रश्मि वैद, डॉ नूर खान, डॉ राजकुमार सक्सेना ने भारत और खासतौर पर लखनऊ शहर के भोज्य पदार्थो को बनाने की विधि, परोसने, उनके रंग, खुशबू और विशिष्ट शब्दावली पर प्रकाश डाला। उन्होंने मारवाड़ी भोजन और लखनऊ शहर के जायको के अन्तर्सम्बन्धों पर भी ध्यान आकर्षित किया। डॉ राजकुमार ने दक्षिण भारत के मसालेदार भोज्य पदार्थो के विशेष लाभ का वर्णन किया और यह सिद्ध कर दिया कि व्यंजनो से सम्बन्धों में भी मधुरता लायी जा सकती है। प्रोफेसर निशी पाण्डेय द्वारा समस्त विशिष्ट अतिथियो को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।





