- झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की घटना ने उठाए सवाल, पति के पास शव ले जाने के लिए नहीं थे पैसे
झांसी। झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक गरीब परिवार घंटों तक पत्नी के शव को घर ले जाने के लिए मदद का इंतजार करता रहा, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
मामला मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के नकटा गांव निवासी राहुल आदिवासी का है। उनकी पत्नी रामवती लंबे समय से बीमार थीं। राहुल पहले उन्हें इलाज के लिए ओरछा अस्पताल लेकर गया, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर डॉक्टरों ने रामवती को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को स्ट्रेचर पर रखकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन परिवार के पास शव को गांव ले जाने के लिए न तो कोई साधन था और न ही पर्याप्त पैसे।
शव के पास बैठा रहा परिवार, बेटी बिलखती रही
पत्नी की मौत के बाद राहुल स्ट्रेचर पर रखे शव के पास ही बैठ गया। उस समय बारिश हो रही थी और वह मेडिकल कॉलेज परिसर में वाहन स्टैंड की छत के नीचे पत्नी के शव के साथ बैठा रहा। पास ही उसकी करीब 8 साल की बेटी नंदनी अपनी मां को देखकर लगातार रोती रही। करीब एक घंटे तक पिता-पुत्री इसी तरह मदद की आस में बैठे रहे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली।
पुलिसकर्मी बना सहारा
इसी दौरान वहां से गुजर रहे यूपी पुलिस के एक सिपाही की नजर उन पर पड़ी। उसने पूरी जानकारी लेने के बाद उनकी मदद का फैसला किया। सिपाही ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और शव को उनके गांव भिजवाने का इंतजाम किया।
सीएमएस ने दी सफाई
मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने कहा कि जिन परिजनों के पास शव ले जाने की व्यवस्था नहीं होती, उनके लिए अस्पताल की ओर से शव वाहन उपलब्ध कराया जाता है। संभव है कि संबंधित परिजन ने अपनी समस्या मेडिकल स्टाफ को नहीं बताई हो।





