अवध कोकीला कमला श्रीवस्तव को कला, साहित्य की श्रद्धांजलि
लखनऊ। अवध की शान, सैकड़ों लोक गीतो की रचयिता, धुन बनाने वाले प्रो कमला श्रीवास्तव को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। भातखंडे की पूर्व प्रोफेसर श्रीमती कमला श्रीवास्तव का लम्बी बीमारी के बाद बीते सोमवार की सुबह निधन हो गया था। उनके 2019 की लिखित इच्छानुसार उनकी नश्वर देह को मेडिकल कॉलेज में दान कर दिया गया था। बेटे रविश खरे और भतीजे नंदीश श्रीवास्तव के संयोजन में लालबाग स्थित हरिओम मंदिर में उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पण करने के उनके कला साहित्य जगत के तमाम कलाकार, साहित्यकार एकत्र हुए। प्रो. कमला श्रीवास्तव अनेकों संस्थानो की संरक्षक, अध्यक्ष, सचिव भी थी, जिससे सभी संस्थाओं के पदाधिकारी सदस्यों सहित श्रृद्धा सुमन अर्पित करने आये। अवध भारती संस्थान के अध्यक्ष राम बहादुर मिसिर ने कहा कि पद्मश्री योगेश प्रवीन के जाने के बाद अवध का दूसरा स्तम्भ ढह गया। 93 की उम्र के पड़ाव पर उनकी जिजिविषा को नमन। पद्मश्री डाक्टर विद्या बिन्दु सिंह ने कहा कि दीदी की सरलता, सहजता, अपनापन कभी नहीं भुलाया जा सकता जितना हो सकता था उन्होंने दिया । विजय अग्निहोत्री ने भजन इंसान जानकार भी इतना समझ ना पाया का पुष्प अर्पित किया। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपने चालीस वर्षों के गुरु मां के साथ के संस्मरण साझा किये। भजन गायक किशोर चतुवेर्दी ने झीनी झीनी बीनी चदरिया निर्गुण के सुमन अर्पित किए। राम भक्त प्रेम मेहरोत्रा, देवकी नंदन शान्त ने अपनी रचनाओं से श्रृद्धा सुमन समर्पित किये। डा उषा सक्सेना, कुमाऊं कोकीला विमल पंत, पदमा गिडवानी, केवल कुमार, अमिता दुबे, संतोष तिवारी, की गुरु वंदना से राम हे राम के बाद ज्योति किरन रतन ने गुर पद लोक पदुम परागा मानस की गुरु स्तुति से नमन किया। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया दीदी के कहने पर कोरोनाकाल में पहली आनलाइन 105 शिष्यो संग लोकगीतों की कार्यशाला आयोजित हुई। कथक गुरु डा कुमकुम धर ने कहा सभी को भरपूर प्यार दिया सहयोग किया। कनक वर्मा ने ज्योति कलश संस्थान, भारतीय लेखिका परिषद, के भेजे शोक संदेश को पढ़ा ,लखनऊ वीमेनस एसोसिएशन की प्रतिमा बाजपेई ने सदस्यों के साथ अपने भावनाओं को व्यक्त किया। पद्मश्री अनूप जलोटा जी सहित कमला दीदी की बहन, और सास समकक्ष लोगों के विडियो संदेश सुनाये गये।





