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श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनकर झूमे श्रद्धालु

बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मन्दिर
लखनऊ। बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मन्दिर में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस विश्वविख्यात श्रीमद्भागवताचार्य किरीट भाई द्वारा कथा में श्रोताओं ने श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में महारास, कंस वध, उद्धव गोपी संवाद, रुकमणी विवाह आदि प्रसंगों का रसपान किया। भगवान शिव के गोपेश्वर रूप का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें मैं का भाव समाप्त हो जाए और केवल भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण रह जाए। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में महारास रचा, तो भगवान शिव उस लीला के दर्शन के लिए आए। रास में केवल गोपियां प्रवेश कर सकती थीं, इसलिए माता योगमाया की कृपा से भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया और गोपेश्वर महादेव कहलाए। यह प्रसंग दशार्ता है कि परम भक्त भी ईश्वर की लीला में सहभागी बनने के लिए अहंकार त्याग देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य में अहंकार, द्वेष और लोभ का भाव रहेगा, वह भक्ति के सागर में डूब नहीं सकता। ब्रजभूमि में आज भी रास मंडल में सबसे पहले गोपेश्वर महादेव की पूजा की जाती है, तत्पश्चात रास आरंभ होता है।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को पा लेना ही जीव की वास्तविक सफलता है। जीव जब ब्रह्म से एकाकार हो जाता है, भक्त जब भगवान में लीन हो जाता है, वही सच्चा मिलन है। रुक्मणी जी लक्ष्मी का अवतार हैं। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय हुआ, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर शरण मांगी। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी का आवाहन स्वीकार कर कुंदनपुर पहुंचकर मंदिर से रुक्मणी जी का हाथ थाम लिया और रथ में बिठाकर द्वारका ले गए । उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत, भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव पार हो जाता है। उसे वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती हैं। महाराज ने कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना, रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया।
आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक हैं। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी हैं। इस अवसर पर मुख्य यजमान अतुल अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, महामंत्री रूपेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल, अनुराग साहू, पंकज मिश्रा सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहें।

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