अहंकार का त्याग ही उत्तम मार्दव धर्म
लखनऊ। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन बुधवार को इंदिरानगर जैन मंदिर मे चल रहे व्याख्यान मे ब्रह्मचारी श्रीपाल ने बताया कि मान कषाय हलाहल जहर के समान है एवं अहंकार करना नरक मे जाने का कारण हो सकता है। उत्तम मार्दव धर्म हमें कोमलता सिखाता है एवं इसको धारण करने वाल व्यक्ति सदेव सुख पाता है। इससे पूर्व जैन मंदिर मे 1008 भगवान शांतिनाथ एवं महावीर स्वामी का 108 कलशों से अभिषेक किया गया एवं विश्व शांति की कामना से से शांतिधारा की गई । भगवान का प्रथम अभिषेक सुरेन्द्र जैन द्वारा किया गया। जैन समाज के मंत्री अभिषेक जैन ने बताया दशलक्षण पर्व के अंतर्गत 1008 दीपकों से भगवान की आरती की गई जिसमे महिलाओं एवं बच्चों ने भक्ति नृत्य भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से अरविन्द जैन सुदीप जैन शिप्रा जैन अतिशय जैन भरत जैन उपस्थित रहे।
उत्तम क्षमा धर्म का पूजन अनुष्ठान

लखनऊ। आशियाना जैन मंदिर में बुधवार को जैन श्रद्धालुओं ने दशलक्षण पर्व पर उत्तम क्षमा धर्म का पूजन अनुष्ठान किया। क्षमाधर्म की महत्ता के विषय में उ.प्र. जैन विद्या शोध संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने बताया कि जिसके मन में सभी प्राणियों के प्रति करुणा और समता भाव होता है उसके हृदय में क्षमा निवास करती है। क्षमा सामाजिक सहिष्णुता प्रदान करता है। क्षमाधर्म पालन से वैर भाव समाप्त होता है।





