आकांक्षा थियेटर आर्ट्स की ओर से नाटक का मंचन
लखनऊ। आकांक्षा थियेटर आर्ट्स, लखनऊ द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के सहयोग से मूल नाट्य रचनाकार सुप्रसिद्ध लेखक सत्यजीत रे की रचना पर आधारित एवं अनुवादन अख्तर अली द्वारा अनुवादित नाट्यकृति असमंजस बाबू की आत्मकथा का नाट्य मंचन सांयकाल 5.30 बजे द्वितीय शिफ्ट में पं. भृगुदत्त तिवारी प्रेक्षागृह, डीएवी (पीजी) कालेज, ऐशबाग रोड, नाका हिन्डोला, लखनऊ में मंचित किया गया। नाटक मंचन से पूर्व उद्घाटन एवं दीप प्रज्वलन सुनील कुमार मिश्रा, एडवोकेट, गवर्निग बॉडी, कल्याण सिंह कैंसर इन्स्ट्ीटयूट लखनऊ तथा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मनमोहन तिवारी एवं विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित राजीव कुमार त्रिपाठी प्राचार्य द्वारा कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया गया। कथावस्तु के अनुसार इस समाज में उसी चीज को नोटिस किया जाता है, जो लीक से हटकर हो, और ये नाटक असमंजस बाबू की आत्मकथा भी कुछ ऐेसे ही पहलूओं को उजागर करता है। इस नाटक का मात्र असमंजस बाबू भी अपनी लीक से हटकर अपनी सोच के कारण समाज से अलग-थलग, पड़ गये, क्योंकि वो विश्वास पर नहीं, विचारों पर जोर देते हैं, अतीत की नहीं भविष्य की चिंता करते हैं, भगवान के बजाये, इन्सान की बात करते हैं, उनका मानना है कि विनाश के बिना नवीन निर्माण नहीं हो सकता, और ऐसी सोच के कारण असमंजस बाबू की कभी किसी से नहीं पटी-ना गुरू से, ना पिता से, ना मित्र से, ना पड़ोसी से और इसी कारण असमंजस बाबू अकेले पड़ गये, और इस एकांत के अंधकार में, एक कुत्ते ने उन्हें राह दिखाई, मार्ग दर्शन किया उनका गुरू बना, जिसे लोग असमंजस बाबू का कुत्ता भी कहते थे। देखते हैं कि एक कुत्ता असमंजस बाबू का गुरू कैसे बना? असमंजस बाबू की प्रधान भूमिका में मोहित यादव ने अपने भावपूर्ण अभियन से रंगदर्शकों को अत्याधिक प्रभावित किया, कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि प्रभात कुमार बोस के नाट्य निदेशन में यह बहुत ही सशक्त प्रस्तुति के रूप में उभर कर दर्शकों के समक्ष रंगशिल्प के प्रत्येक दृृष्टिकोण को रखने में सफल रहा।





