बीएनए के थ्रस्ट सभागार में नाटक का मंचन
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के थ्रस्ट सभागार में सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ के रूपांतरण, परिकल्पना व निर्देशन में नाटक दफ्न करो का मंचन किया गया।
नाटक के कथानुसार एक अज्ञात देश काल में विगत दो वर्षों से चल रहे युद्ध में दो दिनों पूर्व मारे गए छह सैनिकों को वहीं युद्ध क्षेत्र में दफनाया जा रहा है। अचानक ये सैनिक उठ कर खड़े हो जाते हैं और दफन होने से इंकार कर देते हैं। हाई कमांड, आर्मी जनरल, कैप्टन, आदि सभी परेशान हो जाते हैं। वो इन मुर्दो को देश का, देश भक्ति का, सिपाही के कर्त्तव्य का, इतिहास का, जीवन की नश्वरता आदि का वास्ता दे कर दफन हो जाने के लिए राजी करने का प्रयास करते हैं। किन्तु मुर्दा सैनिकों के अपने तर्क हैं- वे कहते हैं कि युद्ध कुछ गिने-चुने लोगों की सत्ता लोलुपता, महत्त्वाकांक्षा और व्यापारिक स्वार्थो के लिए लड़े जाते हैं और इनमें मरते हैं आम आदमी। वे कहते हैं कि वो जीना चाहते थे- एक किसान की जिन्दगी, एक बेटे की जिंदगी, दोस्तों के साथ की जिÞन्दगी, पत्नी-प्रेमिका के साथ प्रकृति, रिश्तों और जीवन की सुन्दरता का आनंद लेते हुए। उन्हें मनाने के लिए उनके घर की औरतों को बुलाया जाता है किन्तु मुर्दो के तर्को के सामने वे भी नाकाम रहती हैं। अंत में जनरल उन मुद्दों को मशीन गन से उड़ाने का प्रयास करता है किन्तु गोलियाँ मुर्दो का क्या बिगाड़तीं ? सभी मुर्दे कब्र से बाहर आ कर लोगों के बीच निकल पड़ते हैं- जीवन के महत्त्व को रेखांकित करते हुए, उनमें युद्ध की भयावहता और कुटिल स्वार्थो के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए। नाटक में अहम भूमिका दीप चंद गुप्ता, संजय शर्मा, पंकज सत्यार्थी, आयुष गुप्ता, ज्योति धामी, यशा श्रीवास्तव, मयूरी द्विवेदी और शालिनी चौहान ने निभायी।





