पट्रोल-डीजल और कुछ आयातित सामान जो एक्साइज एवं कस्टम ड्यूटी के अधीन आते हैं, उनमें टैक्स की दरों में सरकार कुछ हेर-फेर अगर करती तो कुछ गिनी-चुनी चीजों के दाम प्रभावित होते हैं, बाकी अधिकांश वस्तु एवं सेवाएं जीएसटी के दायरे में हैं और इनका दाम बाजार प्रतिस्पर्धा व जीएसटी कर की दर से तय होता है, लेकिन फिर भी हमारे दिमाग में पुरानी चीजें बनी हुई हैं कि बजट से चीजों के दाम घटते-बढ़ते हैं और इसलिए ज्यादातर लोग बजट को इसी नजरिए से देखते हैं कि क्या महंगा हुआ और क्या सस्ता।
नौकरीपेशा वर्ग जो ज्यादा वेतन पाता है वह इन्कम टैक्स की दर और स्लैब को लेकर उत्सुक रहता है और यही चीजें सुर्खियां भी बनती हैं। जो लोग बजट को बस इसी संदर्भ तक देखते हैं और जाहिर है ज्यादातर लोग इसी वर्ग में आते हैं, उनको इस बजट से अवश्य निराशा होगी। लेकिन जो बजट को सस्ता-महंगा और इन्कम टैक्स रेट से आगे बढ़कर देखते हैं उनको यह बजट स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक ऐसी दूरगामी आर्थिक पहल के रूप दिखायी देगा जो सतही लोकप्रियता और न्यूज हेडलाइन से हटकर भारत को स्वस्थ और समृद्ध बनाने का ठोस उपक्रम दिखायी देगा।
बजट भाषण के दौरान बीएसई एवं निफ्टी ने रिकार्ड बढ़त दर्ज की है तो इसके पीछे ठोस वजहें हैं, क्योंकि सरकार ने बजट के माध्यम से उच्च विकास दर को लंबी अवधि तक बनाये रखने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया है। देंग श्याओ पिंग के नेतृत्व में चीन ने 1978 में आर्थिक सुधारों को लागू किया था जिसे देंग ने दूसरी क्रांति कहा था।
आर्थिक सुधारों की राह पर ईमानदारी से आगे बढ़ते हुए चीन ने जो चमत्कारिक उपलब्धियां दर्ज की हैं अगर उनको आंकड़ों में देखा जाये तो एक बार भरोसा करना कठिन होता है। चार दशक की सुधार यात्रा में लंबे समय तक डबल डिजिट ग्रोथ, जीडीपी में 3230 फीसद की वृद्धि, विदेश व्यापार में 17500 फीसद वृद्धि, 70 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से निकालना और वैश्विक जीडीपी में चीन का हिस्सा 1.8 फीसद से बढ़कर18 फीसद तक पहुंचना, यह सब साबित करता है कि अगर विकास की दिशा में लंबी छलांग लगानी है तो सुधार ही एकमात्र उपाय हैं।
अफसरशाही, लालफीताशाही, सब्सिडी, सरकारीकरण और नियमों-कानूनों व रेल्यूलेशन का जंजाल, यह सब देश को खोखला करते हैं। हमें समाजवादी रूमानियत से निकलकर अर्थव्यवस्था की तल्ख हकीकत पर आगे बढ़ना होगा। इसे हम संयोग कहें, सरकार के प्रयास कहें, बॉटम इफेक्ट कहें या आर्थिक पुनर्जीवन, भारत के इतिहास में यह पहला मौका है जब ‘डबल डिजिट ग्रोथ’ का सपना साकार होने जा रहा है। सरकार ने बजट के माध्यम से उच्च विकास दर को बरकरार रखने के लिए ठोस प्रयास किये हैं।
राष्ट्रीय संसाधनों को मोबलाइज कर सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वस्तरीय इन्फ्रा विकसित करने की पहल, दरअसल उच्च विकास दर को लंबी अवधि में बनाये रख सकती है और इसके फलस्वरूप जो रोजगार पैदा होगा, जो संसाधन सृजित होंगे और जो समृद्धि आयेगी उससे निश्चय ही गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक विषमता जैसी चुनौतियों का शमन होगा।





