दो दिवसीय गुरुपूजा कार्यक्रम का आयोजन
लखनऊ। मानव उत्थान सेवा समिति शाखा, लखनऊ के तत्त्वावधान में आयोजित दो दिवसीय गुरुपूजा का कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। लखनऊ के श्री हंस भक्ति धाम आश्रम में भारी संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच बड़े ही धूमधाम से सबसे पहले भजन गायकों ने भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किये। लखनऊ आश्रम के महात्मा बबलेश व सोन बाई ने अनेक भावपूर्ण भजनों के साथ गुरूमहिमा सुनाते हुये जनमानस को उस गुरुजी के चरणों मे बार बार प्रणाम करते हैं, जिन्होंने हमे परमपिता परमेश्वर के बारे में पूर्ण रूप से अवगत कराया। उजला बाई ने कहा कि भारतवर्ष की संस्कृति में गुरुपरम्परा अनादिकाल से चलती आ रही है। सद्गुरु की कृपा से ही जीवन का लंबा समय दु:खसागर में डूबे बिना सरलता पूर्वक निकल जाता है। अंत मे लखनऊ आश्रम के प्रभारी स्वरुपा बाई ने कबीर दास जी के द्वारा बताए गए गुरु महिमा के उदाहरणों को सरलता से समझाते हुये कहा सब धरती कागज करूं, लेखनी सब बनराय, सात समुद्र को मसि करूं, गुरु गन लिखा न जाय। बाई जी ने समझाया कि गुरु का गुण कितना असीमित है। बाई जी ने आगे समझाते हुये बताया, एक गुरु ही है जो हमे अंधकार से प्रकाश तक ले जाता है। गुरु को कीजे दण्डवत कोटि कोटि प्रणाम। कीट न जाने भृंग को,गुरु कर् ले आप समान। अर्थात जैसे भिऋंगी एक कीड़े को अपने समान बना लेता है, वैसे गुरु भी अपने सच्चे शिष्य को अपने ही समान बना देता है। गुरु पैंया लागूं नाम लखाय दीजो रे। गुरु को लाख लाख प्रणाम है जिसने परमेश्र्वर (भगवान)के पावन नाम को प्रत्यछ रूप से अनुभव करा दिया। उपस्थिति जन समुदाय इन प्रकार के प्रसंगों को सुनकर बहुत ही भाव विभोर हो गये,एवम गुरु की जय जय कार करने लगे। अंत मे आरती प्रसाद के साथ पहले दिन के कार्यक्रम का समापन हुआ।





