विजयी छात्रों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुस्कार से सम्मानित किया जायेगा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ द्वारा संस्थान परिसर में आज संस्कृत प्रतिभा खोज सम्मान समारोह का उद्घाटन प्रात: 10:30 बजे उद्घाटन किया गया। सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण के पश्चात मुख्य अतिथियों का वाचिक स्वागत किया गया।
आये हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक विनय श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि जनपदों, मंडलों तथा राज्यस्तर पर कुल 11 प्रतियोगिताओं (संस्कृत गीत, संस्कृत वाचन, संस्कृत सामान्य ज्ञान, श्लोकान्त्याक्षरी, अष्टाध्यायी कण्ठस्थ पाठ, अमरकोष कण्ठस्थ पाठ, लघुसिद्धान्त कौमुदी कण्ठस्थ पाठ, तर्कसंग्रह कण्ठस्थ पाठ, संस्कृत भाषण एवं श्रतुलेखन) में छात्र, अध्यापक आदि सहित कुल 25 हजार से अधिक लोग उपस्थित होते है। संस्कृत प्रतिभा खोज सम्मान समारोह में प्रदेश के 7000 बच्चों की प्रतिभागिता के उपरान्त 11 विधाओं में राज्य स्तर पर 300 बच्चों की सहभागिता में विजयी छात्रों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुस्कार से सम्मानित किया जायेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जितेन्द्र कुमार, अपर मुख्य सचिव, भाषा विभाग आये हुए अतिथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृत संस्थान के पुरस्कार समारोह में वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा था कि उत्तर प्रदेश के हर विद्यालय में, चाहें वह किसी भी माध्यम का हो, किसी भी बोर्ड का हो वहां पर छात्र सामान्य संस्कृत सम्भाषण में बोलते हुए दिखाई दें” इसी पहल के कम में संस्कृत संस्थान दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य छात्रों में छुपी प्रतिभा को पहचानना, प्रोत्साहित करना और मंच प्रदान करना है। संस्कृ त प्रतिभा खोज उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके अन्तर्गत प्रदेश में अध्ययन करने वाले सभी बोर्ड तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी प्रतिभाग करते हैं।
प्रात: 11:00 बजे स्वास्थ्य समग्र विकास पर प्रख्यात चिकित्सक डॉ० पंकज भारती द्वारा कार्यशाला में साधारण खान-पान में परिवर्तन से स्वास्थ्य लाभ, पोश्चर करेक्शन के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ, ट्रांसफोरमेटिव योग धुआँ धुआँ से सम्पूर्ण लाभ, जीवन में कैसे तनाव मुक्त रहें, हृदय रोग, मोटापा, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, अत्याधिक चिन्ता आदि विभिन्न विषयों पर परिचर्चा की गयी। कार्यक्रम में आमंत्रित प्रो० ओमप्रकाश पाण्डेय संस्कृत विद्वान द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किये गये।





