नयी दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विप्रो के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के शेयर लगभग चार प्रतिशत तक लुढ़क गए। यह गिरावट कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के वित्तीय नतीजे घोषित किए जाने के बाद आई है।
शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों ने विप्रो के स्टॉक्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया, जिससे बीएसई पर शेयर 3.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 202.60 रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर भी इसी तरह का रुझान देखा गया और कंपनी का शेयर 3.69 प्रतिशत टूटकर 202.50 रुपये पर कारोबार करता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों में मुनाफे की कमी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
विप्रो द्वारा साझा किए गए वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 3,501.8 करोड़ रुपये रहा। यदि इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की समान तिमाही से की जाए, तो उस समय कंपनी ने 3,569.6 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। मुनाफे में आई यह मामूली गिरावट दर्शाती है कि कंपनी को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अपनी विकास दर बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ रहा है। कंपनी प्रबंधन ने इस गिरावट के पीछे चुनौतीपूर्ण व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को मुख्य कारण बताया है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता और आईटी खर्च में कटौती जैसे कारकों ने विप्रो सहित पूरी आईटी इंडस्ट्री के लिए परिचालन का माहौल कठिन बना दिया है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विप्रो के शेयर में आई यह गिरावट केवल मुनाफे में कमी का परिणाम नहीं है, बल्कि भविष्य के राजस्व मार्गदर्शन (Revenue Guidance) को लेकर बनी चिंताएं भी इसका बड़ा कारण हैं। वर्तमान में आईटी सेक्टर एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है, जहां पारंपरिक सेवाओं की मांग में सुस्ती देखी जा रही है।
हालांकि कंपनी अपने परिचालन मार्जिन को स्थिर रखने का प्रयास कर रही है, लेकिन आय में वृद्धि की धीमी रफ्तार ने बाजार को निराश किया है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी नई रणनीतियों और तकनीकी नवाचारों के जरिए इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और आगामी तिमाहियों में अपनी लाभप्रदता को पुनर्जीवित करने के लिए क्या कदम उठाती है।





