रमजान के दूसरे अशरे में रोजेदार सुबह से ही इबादत व कुरआन-ए-पाक की तिलावत शुरू
लखनऊ। माह-ए-रमजान के दूसरे अशरे में रोजेदार सुबह से ही इबादत व कुरआन-ए-पाक की तिलावत शुरू कर रहे हैं। जिसका सिलसिला देर रात तक जारी है। फर्ज, वाजिब व सुन्नत नमाजों के अलावा तहज्जुद, इशराक, चाश्त, अव्वाबीन, सलातुल तस्बीह आदि नफ्ल नमाजें भी खूब पढ़ी जा रही हैं।
मुफ्ती इरफान मियां फरंगी महली ने कहा कि रमजान जकात देने का बेहतर महीना है। रमजान में जकात देने का ज्यादा सवाब है। रमजान तमाम महीनों का सरदार है। इस महीने में जो भी इबादत की जाती है उसका सवाब 70 गुना ज्यादा बढ़ जाता है। इसी तरह इस महीने अदा की जाने वाली जकात का भी सवाब बढ़ जाता है। जो शख्स अमीर (साहब ए निसाब) होकर जकात से जी चुराता है वो अल्लाह की नाराजगी हासिल करता है। इसलिए हर हैसियतमंद इंसान को जकात देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जकात की अहमियत इस बात से पता चलती है कि कुरआन में अल्लाह पाक ने जकात का बयान 32 जगहों पर किया है। इस्लाम के पांच बुनियादी चीजों में जकात तीसरे स्थान पर है। आज मुसलमानों में जो गरीबी है वो इस तरफ इशारा कर रही है कि जकात की अदायगी ठीक तरह से नहीं हो रही है। सभी लोग जकात अदा करें तो इसे एकत्र कर मुसलमानों की गरीबी को दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही मुफ्ती इरफान मियां ने जकात कौन दे सकता है, जकात कितनी देना चाहिए, जकात किसको दे सकते हैं, जकात किसे नहीं दे सकते हैं जैसे बिन्दुओं पर तफ्सील से रोशनी डाली।
इस्लामिक सेन्टर आॅफ इंडिया की रमजान हेल्पलाइन और शिया हेल्पलाइन पर रमजान से जुड़े सवालों के जवाब दिए गए।





