महामारी का खतरा अभी पूरी दुनिया में ज्यों का त्यों बना हुआ है। एशिया में यह लगातार भयावह हो रहा है और यूरोप व अमरीका पहले की तरह संकट से जूझ रहे हैं। यह संकट कब खत्म होगा और कब सामान्य कारोबार बहाल होगा, इस बारे में अभी अनुमान लगाना बहुत प्रीमेच्यौर है।
लेकिन महामारी के व्यापक असर के कारण चालू वित्त वर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था में पांच फीसद से अधिक कमी आने की आशंका है और इसी कड़ी में भारत की जीडीपी में भी 3.2 से 5 फीसद तक गिरावट का अनुमान विश्व बैंक, फिच, मूडी और स्टैंडर्ड एण्ड पुअर्स ने लगाया है, लेकिन ब्रॉड इंडिया पर सबका भरोसा कायम है और यही कारण है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की प्रगति तेज होने की भविष्यवाणी दुनिया की तमाम प्रतिष्ठित एजेसियों ने की है।
महामारी के कारण कर राजस्व घटने और अर्थव्यवस्था को उबारने व गरीबों को राहत देने से कर्ज बढ़ेगा। इससे राजकोषीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका जाहिर करते हुए मूडी ने पिछले सप्ताह भारत की सांवरेन रेटिंग में कटौती कर इसे बीएए3 कर दिया था। यह निगेटिव आउटलुक के साथ निवेश का भी निम्नतम स्तर है, लेकिन इसके बावजूद मूडी ने भी भारत की प्रगति पर कोई संदेह नहीं जताया है। चालू वित्त वर्ष में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट में है और इसका असर भारत पर भी पड़ेगा और अर्थव्यवस्था में भी कमी आयेगी।
मूडी ने यह कमी चार प्रतिशत तक होने की बात कही है, लेकिन ठीक अगले साल तेज विकास दर्ज करते हुए जीडीपी ग्रोथ 8.7 फीसद तक पहुुंचने का अनुमान भी लगाया है। मूडी के इस अनुमान को ही आगे बढ़ाते हुए अब दो और प्रतिष्ठित एजेंसियों ने भी इंडिया इंक की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा जताया है। स्टैंडर्ड एण्ड पुअर्स ने महामारी के प्रभाव का विश्लेषण इसमें चालू वित्त वर्ष में पांच फीसद कमी आने का अनुमान लगाया है, लेकिन ट्रिपल-बी अर्थात स्थिर आउट लुक के साथ अगले साल 8.5 फीसद की दर से प्रगति की बात कही है।
फिच ने दो कदम आगे बढ़ते हुए ट्रिपल-बी रेटिंग एवं स्थिर आउटलुक के साथ जीडीपी ग्रोथ 9.5 फीसद होने का अनुमान लगाया है। किसी भी रेटिंग एजेंसी के द्वारा यह अब तक का सर्वोच्च अनुमान है। ब्रॉड इंडिया को लेकर विभिन्न एजेंसियों का यह भरोसा दरअसल इस बात की पुष्टि करता है कि भारत कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में ग्लोबल ग्रोथ का इंजन बनने को तैयार है।
महामारी ने विश्व और भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा सदमा दिया है लेकिन इस चुनौती से उबरने के बाद भारत के सामने अवसरों की भरमार भी है। डैÑगन की बिगड़ती छवि और आर्थिक शक्ति के गलत इस्तेमाल ने दुनिया को चौकन्ना कर दिया है। अब चीन से मैन्युफैक्चरिंग दूसरे देशों में शिफ्ट हो रही है और इसका एक बड़ा हिस्सा भारत में निश्चित ही आयेगा, क्योंकि भारत को लोकतंत्र, युवा आबादी, प्रशिक्षित मैन पावर एवं सस्ता श्रम दुनिया भर के निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य स्तर बनाती है।





