आयुर्वेद व योग कोरोना के इलाज एवं बचाव दोनों में बहुत प्रभावी हैं, यह तथ्य न सिर्फ प्रमाणित हो चुका है बल्कि कोरोना महामारी के दौरान यह साबित भी हो चुका है। देश में मार्च के प्रथम सप्ताह से लगातार कोरोना के मामले आने और बढ़ने शुरू हुए तो इससे बचाव के लिए भारत सरकार, मीडिया और विशेषज्ञों ने तमाम आयुर्वेदिक उपाय सुझाये थे। कोरोना शुरू में बहुत भयावह था क्योंकि मृत्यु दर बहुत अधिक थी, लेकिन जैसे-जैसे लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए आयुर्वेदिक एवं देसी तौर-तरीकों को अपनाना शुरू किया तो मृत्यु दर लगातार घटती चली गयी।
एक समय कोरोना से भारत में मृत्यु दर 30 फीसद तक थी, लेकिन जैसे-जैसे लोगों ने आयुर्वेद का सहारा लिया तो कोरोना से मौतें घटती गयीं और आज जब देश में हर दिन दिन अस्सी-नब्बे हजार संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं तब कोरोना को लेकर कोई चिंता देश में नहीं है, तो इसका कारण आयुर्वेद ही है। क्योंकि आयुर्वेद ने कोरोना को परास्त कर दिया है। लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए गर्म पानी, हल्दी दूध, काढ़ा, योग-व्यायाम, संतुलित भोजन, बेहतर नींद के तमाम अन्य उपाय किये जिससे मृत्यु दर घटकर डेढ़ फीसद के करीब पहुंच गयी है।
बचाव व इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जो उपाय किये गये उससे अन्य बीमारियां मसलन आम तौर पर मौसम बदलने के समय होने वाला सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खरास, बुखार आदि भी बहुत कम हो गये हैं। यह सब हमारे परम्परागत ज्ञान जिसे हम दादी-नानी के नुस्खे कहते हैं उनका और शाकाहार व आयुर्वेद के कारण संभव हुआ है। अब इसी तथ्य को आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक अध्ययन के जरिये प्रमाणित करने का काम किया है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक मेडिकल स्टडी में पुष्टि हुई है कि कोरोना से बचाव के लिए अश्वगंधा, गिलोय, लौंग और आयुष-64 जैसी औषधियां बहुत प्रभावी हैं। इसी के मद्देनजर आयुष मंत्रालय ने कोविड मैनेजमेंट प्रोटोकाल जारी किया है जिसमें हल्के लक्षण एवं एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के इलाज, संक्रमण से बचाव के उपाय, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर जरूरी सावधानी एवं बचाव के साथ कोरोना से लड़ने के लिए शरीर को तैयार करने के वास्ते इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए आवश्यक उपाय बताये गये हैं।
कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत होती है और ऐसे मरीजों का इलाज कोविड अस्पताल में होना जरूरी है, लेकिन जो मरीज हल्के लक्षण वाले अथवा एसिम्प्टोमैटिक हैं उनका इलाज आयुर्वेदिक दवाओं, जड़ी-बूटियों एवं औषधीय काढ़ा से हो सकता है। यह इलाज किसी अस्पताल में भी हो सकता है और इलाज के लिए जारी एसओपी का पालन करते हुए मरीज घर पर भी कर सकते हैं।
दरअसल भारत में कोरोना के जो मरीज सामने आ रहे हैं उनमें लगभग 95 फीसद मरीज माइल्ड एवं एसिम्प्टोमैटिक होते हैं और अगर इनका इलाज घर से या आयुर्वेद से किया जाये तो कोरोना के महंगे इलाज से पूरी तरह से बचा जा सकता है। वेंटिलेटर की जरूरत सिर्फ आधा फीसद को, आॅक्सीजन की जरूरत दो-तीन फीसद को और अस्पताल में इलाज की जरूरत पांच फीसद को ही होती है।





