जितेन्द्र मित्तल की स्मृति में यायावर रंगमंडल की ओर से तीन दिवसीय नाट्य समारोह का दूसरा दिन
लखनऊ। जितेन्द्र मित्तल की स्मृति में यायावर रंगमंडल की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नाट्य समारोह के बुधवार को दूसरे दिन नृत्य नाटिका थैक्यू जिन्दगी की प्रस्तुति हुई। गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के वाल्मिकी प्रेक्षागृह में आयोजित इस नृत्य नाटिका का निदेशन पुनीत मित्तल और लेखन छवि मिश्रा ने किया। विलियम शेक्सपियर की कविता सेवन एजेज आफ मेन से प्रेरित नृत्य नाटिका थैंक यू जिन्दगी इंसान के पूरे जीवन चक्र को दशार्ती है। जिसमें उसके कर्म, मन और परिवर्तन उसके सहयात्री है।
इस कहानी के नायक जीवन को बचपन में अपने परिवार से ढेर सारा प्यार मिलता है। बडा होने पर कर्म उसे उसके कर्माे से अवगत कराता है। वह पूरे उत्साह लगन और मेहनत के साथ पढाई करता है। फिर उसके जीवन में परिवर्तन आता है और उसे एक लडकी से प्यार हो जाता है। लेकिन लडकी के पिता को उसका यह रिश्ता मंजूर नही होता क्योंकि वह उसकी बिरादरी का नहीं है। लडकी की शादी कहीं और हो जाती है। जीवन का जीवन अंधकारमय हो जाता है वह पूरी तरह से टूट जाता है। उस समय कर्म उसको कर्मशील मन उसको संयम और परिवर्तन उसे खुद को परिवर्तित कर अपनी जीवन यात्रा जारी रखने की सीख देते हैं। अब वह एक सिपाही बनकर दुनिया के सामने आता है। पहले से कहीं ज्यादा कर्मबद्व, वचनबद्व और निडर होकर। खुद में अपना एक हाथ खो देने के बाद भी वह विचलित नही होता क्योंकि अब उसे अपने कर्म पर विश्वास हो चुका है। उसका मन संयम में है और परिवर्तन को वह स्वीकार कर चुका है कि यह प्रकृति का नियम है। अंत में चलते.चलते वह अपने अतीत के अनुभवों के आधार पर जिन्दगी को थैंक यू बोलता है कि उसको जिन्दगी के इतने सारे रंग देखने को मिले और उसे यहां पर दुख.सुख, जय.पराजय और सत्य.असत्य को बहुत ही नजदीक से देखने और अनुभव करने का मौका मिला।





