एक ऐसे दौर में जब चीन अपने आकार-प्रकार और आर्थिक शक्ति के कारण दुनिया भर की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है, विस्तारवादी महत्वाकांक्षा इस हद तक पाले है कि एक दर्जन देशों के साथ उसका सीमा विवाद है। यह विवाद इसलिए है कि चीन ऐतिहासिक कारणों से दूसरे देशो की जमीन पर नाजायज दावा करता है। तिब्बत पर उसने पूरी तरह कब्जा कर लिया है, ताईवान को कब्जाने का संकल्प है और इग्लैंड के साथ हुए समझौतों को धता बताते हुए हांगकांग को पूरी तरह चीनी आधिपत्य में लाने को उतावला है।
दूसरे देशों की सीमाओं में घुसकर पड़ोसी देशों की संप्रभुता को चुनौती देने, जमीनों पर कब्जा करने और मौका पाकर पूरे देश पर कब्जा कर लेने की खतरनाक नीति के कारण आज चीन से विश्व शांति को बहुत बड़ा खतरा है। यह अनायास ही नहीं है कि चीन की 23 हजार किलोमीटर लंबी सीमाओं पर एक दर्जन से अधिक देशों के साथ सीमा विवाद है। जमीनी के साथ वह समुद्री सीमा वाले देशों को भी परेशान करता है। समय-समय पर ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया के समुद्री क्षेत्र पर दावा कर अपना आधिपत्य जमाने के फिराक में रहता है।
साउथ चाइना सी पर चीन की बुरी नजर तो बहुत दिनों से क्योंकि इसी क्षेत्र से दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार होता है। चाइना की इन हरकतों के कारण उसके पड़ोसी देशों को तनावों के दौर से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यह समय की मांग है कि चीन की हरकतों पर लगाम लगाने के लिए साझा हितों वाले सभी देशों के बीच व्यापक रक्षा, सामरिक, आतंकवाद और व्यापार से जुड़ी संधि हो और चीन को औकात में लाने के लिए वैश्विक स्तर पर उसका बॉयकॉट हो। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच वर्चुअल समिट में रक्षा व सामरिक सहयोग पर बनी सहमति इस दिशा में एक बेहतर शुरूआत हो सकती है।
गौरतलब है कि चीन रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसियों को कर्ज से लादकर उन्हें अपने इशो पर नचाता है और जो देश उसके इशारों पर नहीं चलते उनके साथ वह टकराव का रुख अपनाता है। चीन का सीमा विवाद उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के साथ भी है लेकिन इनसे टकराव नहीं करता, रूस के साथ भी सीमा विवाद था लेकिन रूस की ताकत के सामने नत मस्तक होकर उसने सीमा विवाद को सुलझा लिया। लेकिन अन्य देशों के साथ वह सीमा विवाद सुलझाता नहीं बल्कि उलझाये रखना चाहता है ताकि विवाद की आड़ में वह अधिक से अधिक आगे बढ़कर उनकी जमीनों को कब्जा सके।
चीन की इन हरकतों पर मजबूत लगाम लगाने के लिए जरूरी है कि भारत सहित वे सभी देश एकजुट हों जिनको चीन की उग्रता से असहज स्थिति क सामना करना पड़ता है। पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम की वर्चुअल समिट में सामरिक एवं रक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता और फ्रॉस, यूएसए एवं सिंगापुर के साथ ऐसा ही सामरिक समझौता दरअसल चीन की हरकतों रणनीतिक जवाब भी है।





