लखनऊ। पद्मिनी एकादशी व्रत शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सावन के महीने में मनाई जाती है। इस बार पद्मिनी का व्रत अधिक मास में रखा जाएगा। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है साथ ही पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा विधि क्या है। पद्मिनी एकादशी तिथि का आरंभ 28 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से आरंभ होगी और 29 जुलाई को रात के समय 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। ऐसे में पद्मिनी एकादशी का व्रत 29 जुलाई को रखा जाएगा। वहीं, 30 तारीख को सुबह सूर्योदय से 2 घंटे के अंदर अंदर एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, सावन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पद्मिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। जो एकादशी अधिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है उसे पद्मिनी एकादशी कहते हैं। क्योंकि पद्मिनी एकादशी का व्रत जो महीना अधिक हो जाता है उसपर निर्भर करता है, इसलिए पद्मिनी एकादशी का उपवास करने के लिए कोई चन्द्र मास तय नहीं है।
पद्मिनी एकादशी व्रत 29 का पूजा मुहूर्त
29 जुलाई को पूजा का मुहूर्त सुबह 07 बजकर 22 मिनट से सुबह 09 बजकर 04 मिनट तक है। इसके बाद दोपहर में शुभ समय 12 बजकर 27 मिनट से शाम 05 बजकर 33 मिनट तक है।
पद्मिनी एकादशी व्रत के लाभ
पद्मिनी एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के मान-सम्मान और धन.धान्य में समृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। व्यक्ति को भगवान हरि की कृपा से मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। इस व्रत को करने से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है।
पद्मिनी एकादशी महत्व
मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत जो व्यक्ति रखता है वह इस जीवन में हर तरह के सुख भोग कर भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को रखने से यज्ञ, तप और दान का महत्व है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं व्रत को नियम और संयम के साथ पालन करें।
पद्मिनी एकादशी पूजा विधि
पद्मिनी एकादशी के दिन पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए। पद्मिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा में पीले रंग के फूल, धूप, दीप, अक्षत, चंदन और दूर्वा अर्पित करें। साथ ही इस दिन पद्मिनी एकादशी की कथा पढ़ें और विष्णु चालीसा का पाठ करें और अंत में विष्णु चालीसा का पाठ जरूर करें। इस दिन पूरे दिन व्रत करें और शाम के समय फलाहार करें। अगले दिन व्रत खोलें।





