प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान केन्द्र सरकार अपने कार्यकाल के शुरुआत से ही जिस तरह एक-एक कर कई साहसिक और ऐतिहासिक महत्व के फैसले कर रही थी उससे इस सरकार को आजाद भारत के इतिहास की सबसे मजबूत और ठोस फैसले लेने वाली सरकार की संज्ञा दी जाने लगी थी।
लेकिन बीते छह महीनों के दौरान कोरोना संकट ने जिस तरह से पूरी दुनिया को शिकंजे में लिया उससे भारत भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ और इस कारण सरकार का पूरा ध्यान कोरोना से निपटने की तरफ रहा। मार्च महीने से ही देश में लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, श्रमिकों, गरीबों एवं दिहाड़ी मजदूरों की समस्या इतनी जटिल हो गयी थी कि सरकार के सुधारात्मक कदम थम गये थे।
कोरोना से निपटने, आवश्यक संसाधनों को जोड़ने एवं बीमारी की जांच एवं इलाज के लिए जरूरी संरचना विकसित करने पर सरकार का पूरा ध्यान रहा। इस दौरान हेल्थकेयर सेक्टर में काफी सुधार भी हुआ है। लेकिन अब सरकार धीरे-धीरे फिर से अपनी रौ में लौट रही है और एक के बाद एक, नये-नये सुधारों को आगे बढ़ा रही। ये सुधार इतने जरूरी थे कि इन्हें आजादी के पहले ही दिन से लागू करने की जरूरत थी, लेकिन इसे युवाओं के प्रति सरकारों की संवेदनहीनता ही कहेंगे कि इन छोटे-छोटे सुधारों को भी इतने दशकों का इंतजार करना पड़ा। सरकारी नौकरियों का देश में कितना टोटा है, यह किसी से छिपा नहीं है।
सरकारी नौकरी की चाह में युवाओं की पूरी जवानी निकल जाती है लेकिन नौकरी नहीं मिलती। एक-एक पद के लिए हजार-हजार दावेदार होते हैं, ऐसे में नौकरी तो बहुत कम को मिलती है लेकिन सरकारी भर्तियों के लिए फार्म भरने, परीक्षा देने और परीक्षा शुल्क जमा करने में इतना समय और पैसा खर्च करना पड़ता है कि जब युवा 30 साल या 40 साल बाद ओवरएज होते हैं तो उनकी जवानी का एक महत्वपूर्ण समय निकल जाता है और जेब भी पूरी तरह खाली हो जाती है।
लेकिन मोदी सरकार धीरे-धीरे इन समस्याओं का सुधारों के जरिये समाधान कर रही है। कुछ समय पहले मेडिकल की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले छात्रों को हर साल सीबीएसई पीएमटी, सीपीएमटी, बीएचयू पीएमटी, एएमयू पीएमटी जैसी चार-पांच परीक्षाएं हर साल देनी पड़ती थी। इनके परीक्षा शुल्क, अलग-अलग किताबों, दूर-दराज के शहरों में परीक्षा देने आदि पर हर साल दस-पन्द्रह हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। इस समस्या का समाधान केन्द्र सरकार ने नीट के जरिये किया। अब एक ही परीक्षा से पूरे देश में प्रवेश मिल सकता है।
एक देश-एक टैक्स, एक देश-एक बाजार, एक देश-एक राशन कार्ड, एक देश-एक पहचान के बाद अब सरकार ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी बनाकर एक देश-एक परीक्षा की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाया है। राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी केन्द्र सरकार के गु्रप बी एवं सी के सभी नॉन टेक्निकल पदों के लिए परीक्षा लेगी और इसी परीक्षा के स्कोर के जरिये सभी भर्तियां होंगी। अभी इसमें एसएससी, आईपीबीएस और आरआरबी शामिल हुए हैं।
भविष्य में राज्य सरकारें, पीएसयू, पीपीपी उपक्रम भी राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी के साथ समझौता करके अपने यहां परीक्षाओं का झंझट खत्म कर सकते हैं। इससे भर्तियों में धांधली खत्म होगी, छात्रों का समय और पैसा भी बचेगा। इस तरह यह एक क्रांतिकारी सुधार है जिसे बहुत पहले जो जाना चाहिए।





